Tue Oct 29 11:50:00 UTC 2024: ## रूप चतुर्दशी: अकाल मृत्यु से मुक्ति और सौंदर्य निखारने का त्योहार
**इंदौर/ग्वालियर:** पंच पर्व में धनतेरस के बाद आने वाला रूप चतुर्दशी का त्योहार इस वर्ष अकाल मृत्यु से मुक्ति और सौंदर्य निखारने के लिए अलग-अलग दिन मनाया जाएगा। ज्योतिषविदों के अनुसार, इस दिन यमराज के साथ भगवान कृष्ण और मां काली की भी पूजा की जाती है।
नरक चतुर्दशी की शाम को यमराज, मां काली और हनुमान जी की पूजा करने के बाद, घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर चार बत्तियों का दीपक जलाकर यमराज का ध्यान करते हुए पूर्व दिशा की ओर मुख करके दीपदान करने की परंपरा है। यह माना जाता है कि इससे अकाल मृत्यु का संकट टलता है।
रूप चतुर्दशी के दिन अभ्यंग और स्नान को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में या सूर्योदय से पहले उठकर, हल्दी, चंदन, बेसन, शहद, केसर और दूध से उबटन बनाकर स्नान करने से व्यक्ति का सौंदर्य वर्षों तक कायम रहता है।
ग्वालियर में परंपरागत उबटन की जगह हर्बल और आर्गेनिक फेशियल किट और अन्य ब्यूटी प्रोडक्ट्स ने ले ली है। महिलाएं इस दिन ब्यूटी ट्रीटमेंट ले रही हैं और हल्दी, दूध, चंदन, बेसन से बने हर्बल और आर्गेनिक प्रोडक्ट्स की मदद से अपनी खूबसूरती निखार रही हैं।