Wed Oct 16 12:42:41 UTC 2024: ## शरद पूर्णिमा 2024: तिथि विवाद, खीर का महत्व और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद

इंदौर, 15 अक्टूबर: साल की 12 पूर्णिमा तिथियों में से शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व है। लेकिन इस बार, शरद पूर्णिमा की तिथि को लेकर विवाद चल रहा है। जबकि कुछ विद्वान 16 अक्टूबर को शरद उत्सव मनाने की बात कह रहे हैं, तो कुछ अन्य 17 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा मनाने की वकालत कर रहे हैं।

पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 16 अक्टूबर को दोपहर के बाद शुरू होकर 17 अक्टूबर को देर शाम तक रहेगी। उदय तिथि की मान्यता के अनुसार, 17 अक्टूबर को शरद उत्सव मनाना ज्यादा उचित होगा।

इस दिन खीर बनाने और उसे सारी रात चंद्रमा की रोशनी में रखकर अगले दिन खाने का विधान है। ज्योतिषाचार्य पंडित गिरीश व्यास के अनुसार, इस रात चंद्रमा अमृत वर्षा करता है और इस खीर के सेवन से शारीरिक और मानसिक परेशानियों से राहत मिलती है।

खीर चर्म रोगों, मानसिक परेशानी में रामबाण और आंखों की रोशनी बढ़ाने में भी मदद करती है। एक अन्य मान्यता के अनुसार, इस रात चंद्रमा के दर्शन करने से भी आंखों की रोशनी बढ़ती है।

पंडित व्यास कहते हैं कि जिस भी व्यक्ति का चंद्रमा कुंडली में कमजोर हो, उसे हर पूर्णिमा की रात में जल भरकर चंद्रमा के नीचे रख देना चाहिए और अगले दिन उस पानी को पीने से मानसिक परेशानियों से राहत मिलती है। शरद पूर्णिमा पर यह उपाय और भी प्रभावी होता है।

कई जगहों पर इस रात मिट्टी के घड़े में पानी भरकर रखा जाता है और अगली सुबह उस पानी से नहाया जाता है। ऐसा करने से शारीरिक रोग-दोष दूर होते हैं।

शरद पूर्णिमा को मां लक्ष्मी के प्राकट्योत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। उन्हें खीर काफी पसंद है। लिहाजा, शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी को खीर का भोग लगाने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

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