Tue Nov 12 03:00:00 UTC 2024: ## देवउठनी एकादशी: भगवान विष्णु की जागरण और मांगलिक कार्यों की शुरुआत

आज, देवउठनी एकादशी, भगवान विष्णु अपनी चार महीने की निद्रा से जागते हैं और मांगलिक कार्यों की शुरुआत का दिन माना जाता है। इस दिन, घरों में महिलाएं देवताओं को जगाने की रस्म निभाती हैं। इस रस्म में, गेरू और चावल के आटे से देवताओं की आकृतियाँ बनाई जाती हैं। इन आकृतियों में, विष्णु भगवान, माता लक्ष्मी, तुलसी जी, अष्टदल कमल, स्वर्ग की सीढ़ी, सूरज, चांद, स्वास्तिक, पंचदेव, आदि शामिल होते हैं।

विष्णु भगवान की आकृति से एक रेखा जमीन तक खींची जाती है, जिसका चक्र बनाया जाता है। घर के सदस्यों के पैर जमीन पर बनाए जाते हैं। इसके बाद, गेहूं, सब्जियां, सिंघाड़े, शकरकंद, आंवला, फल, दक्षिणा, दूध की सेवईं, और मिठाई रखे जाते हैं। थाली को ढक कर उस पर स्वास्तिक बनाया जाता है और थपकी देते हुए, गीत गाए जाते हैं, “उठो देव बैठो देव”।

फिर देवताओं को जल अर्पित किया जाता है, हाथ जोड़कर तिलक लगाया जाता है, और पांच दीपक जलाए जाते हैं। अंत में, भगवान से प्रार्थना और क्षमा याचिका की जाती है।

**ध्यान दें:** यह लेख देवउठनी एकादशी की रस्मों के बारे में सामान्य जानकारी प्रदान करता है। सभी परंपराओं में रस्मों के तरीके अलग-अलग हो सकते हैं।

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