Wed Sep 11 05:01:55 UTC 2024: ## जानवरों से इंसानों में फैलती बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है, मंकीपॉक्स नया उदाहरण:
दुनिया भर में पिछले 15-20 सालों में कई जानवरों से फैलने वाली बीमारियों का प्रकोप देखा गया है. सार्स (2003), मर्स और H1N1 स्वाइन फ्लू (2009), इबोला, जीका वायरस और अब मंकीपॉक्स – ये सभी जानवरों से इंसानों में फैलने वाली बीमारियां हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का अनुमान है कि हर साल 1 अरब से ज़्यादा लोग जानवरों से फैली बीमारियों से पीड़ित होते हैं, जिनमें से लाखों की मौत भी हो जाती है.
मंकीपॉक्स की उत्पत्ति अफ्रीका में हुई थी और 1958 में डेनमार्क के एक लैब में बंदरों में पहली बार इसका पता चला था. 1970 में कॉन्गो में एक 9 महीने के बच्चे में यह वायरस पाया गया और तब से अफ्रीका में कई लोगों में इसके मामले सामने आते रहे हैं. 2003 में यह वायरस अमेरिका में फैला, तब से यह कई देशों में देखा गया है. भारत में भी एक व्यक्ति में मंकीपॉक्स की पुष्टि हो चुकी है.
हालांकि, मंकीपॉक्स एक दुर्लभ बीमारी है, लेकिन यह चेचक जैसे लक्षण पैदा कर सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि मंकीपॉक्स से घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि अगर यह वायरस इंसानों से इंसानों में फैलना शुरू कर देता है, तो जानवरों की भूमिका कम हो जाती है.
इसके बावजूद, विशेषज्ञ चिंतित हैं कि जानवरों से फैलने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है. विशेषकर फैक्ट्री फार्मिंग की वजह से जानवरों में वायरल बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ता है.
कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि वेजिटेरियन डाइट अपनाकर इन बीमारियों से बचा जा सकता है, क्योंकि यह जानवरों के उत्पादन के लिए उपयोग होने वाली जमीन और संसाधनों को कम करेगा.