Sat Sep 28 14:04:57 UTC 2024: ## शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती: देश की आजादी के लिए हंसते हंसते प्राणों का बलिदान
**नई दिल्ली:** आज महान क्रांतिकारी शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती है। उनका जन्म 28 सितंबर 1907 को लायलपुर (अब फैसलाबाद, पाकिस्तान) के गांव बावली में हुआ था। देश की आजादी के लिए हंसते-हंसते प्राणों का बलिदान देने वाले भगत सिंह का व्यक्तित्व और उनके विचार आज भी हमें प्रेरित करते हैं।
भगत सिंह ने अपनी देशभक्ति के साथ-साथ अपने विचारों से अलग-अलग बंटे भारत को एक करने का काम किया। उनके विचारों से स्वतंत्रता की लहर और तेज़ हुई।
यहां भगत सिंह के जीवन के कुछ महत्वपूर्ण पहलू दिए गए हैं:
* **क्रांति की शुरुआत:** भगत सिंह के पिता किशन सिंह, चाचा अजीत सिंह और स्वर्ण सिंह स्वतंत्रता सेनानी थे। भगत सिंह की पढ़ाई लाहौर के डीएवी हाई स्कूल में हुई। 1919 में असहयोग आंदोलन के दौरान, 15 साल की उम्र में ही वे गुप्त क्रांतिकारी गतिविधियों में भाग लेने लगे।
* **जलियांवाला बाग का दर्द:** 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग में हुई नरसंहार ने भगत सिंह को गहराई से प्रभावित किया। उन्होंने अंग्रेजी सरकार के खिलाफ लड़ने की कसम खाई और लाहौर नेशनल कॉलेज की पढ़ाई छोड़कर ‘नौजवान भारत सभा’ की स्थापना कर डाली।
* **काकोरी कांड:** भगत सिंह ने सुखदेव और राजगुरु के साथ मिलकर काकोरी कांड को अंजाम दिया।
* **सांडर्स की हत्या:** भगत सिंह ने राजगुरु के साथ मिलकर 17 दिसंबर 1928 को अंग्रेज़ अफसर जेपी सांडर्स की हत्या की।
* **बम और पर्चे:** भगत सिंह ने बटुकेश्वर दत्त के साथ मिलकर 8 अप्रैल 1929 को ब्रिटिश भारत की तत्कालीन सेंट्रल असेंबली में बम और पर्चे फेंके थे।
* **’इंकलाब जिंदाबाद’:** भगत सिंह का ‘इंकलाब जिंदाबाद’ नारा आज भी प्रसिद्ध है।
* **फांसी:** भगत सिंह को 7 अक्टूबर 1930 को मौत की सजा सुनाई गई थी। अंग्रेजों ने उन्हें 23 मार्च 1931 को फांसी पर चढ़ा दिया।
भगत सिंह एक ऐसे महान क्रांतिकारी थे जिन्होंने अपनी जान की बाजी लगाकर देश की आजादी के लिए संघर्ष किया। उनके विचार और बलिदान आज भी हमें प्रेरित करते हैं।