Tue Sep 17 04:53:43 UTC 2024: ## अनंत चतुर्दशी 2024: अनंत सुख और मोक्ष का व्रत

**नई दिल्ली:** हिंदू धर्म में अनंत चतुर्दशी का व्रत बहुत महत्वपूर्ण है। यह व्रत हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को किया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और अनंत सूत्र बांधने का भी विधान है।

इस व्रत को करने से अनंत सुख की प्राप्ति होती है और पापों का नाश होकर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु की मूर्ति को गंगाजल से स्नान कराकर साफ वस्त्र पहनाया जाता है। उन्हें तुलसी के पत्ते, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य और रोली आदि अर्पित किए जाते हैं। भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप किया जाता है और खीर, खोआ से बनी मिठाई चढ़ाई जाती है।

**कथा के अनुसार:**

पौराणिक कथाओं के अनुसार, पांडवों ने भी इस व्रत को करके अपने खोए हुए राज्य को वापस पाया था। एक बार महाभारत में, दुर्योधन ने पांडवों को 12 वर्ष वनवास दिया था। वन में भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर को अनंत चतुर्दशी का व्रत करने को कहा और बताया कि इससे खोया हुआ राज्य भी मिल जाएगा।

श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को एक कथा सुनाई। प्राचीन काल में एक ब्राह्मण की कन्या सुशीला का विवाह कौण्डिनय ऋषि से हुआ था। रात होने पर ऋषि नदी के किनारे विश्राम करने लगे और सुशीला ने उनसे अनंत व्रत का महत्व पूछा। ऋषि ने उसे व्रत का महत्व बताया और सुशीला ने 14 गांठों वाला डोरा अपने हाथ में बांध लिया।

कौण्डिनय ऋषि इस डोरे को देखकर नाराज हो गए और उसे आग में डाल दिया। इससे अनंत भगवान का अपमान हुआ और ऋषि की सारी संपत्ति नष्ट हो गई। पश्चाताप की अग्नि में जलते हुए, ऋषि अनंत भगवान की खोज में वन की ओर चले गए और बेहोश हो गए।

भगवान अनंत ने उन्हें दर्शन देते हुए बताया कि उनके अपमान के कारण ही यह विपत्ति आई। उन्होंने ऋषि से 14 वर्षों तक विधि विधान से यह व्रत करने को कहा। ऋषि ने ऐसा ही किया और उनके सभी कष्ट दूर हो गए और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई। श्रीकृष्ण की आज्ञा से युधिष्ठिर ने भी अनंत भगवान का व्रत किया जिससे पाण्डवों को महाभारत के युद्ध में जीत मिली।

**इस वर्ष अनंत चतुर्दशी 30 अगस्त, 2024 को मनाई जाएगी।**

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