Tue Sep 17 14:54:06 UTC 2024: ## अनंत चतुर्दशी 2024: भविष्य पुराण में वर्णित व्रत जो पापों का नाश करता है
**नई दिल्ली:** भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाने वाला अनंत चतुर्दशी का पर्व भविष्य पुराण में वर्णित है. इस पर्व के बारे में भगवान कृष्ण ने महाराज युधिष्ठिर को बताया था. अनंत चतुर्दशी व्रत को सभी पापों का नाशक, कल्याणकारक और सभी कामनाओं को पूर्ण करने वाला माना जाता है.
भविष्य पुराण के अनुसार, कृतयुग में वसिष्ठगोत्री ब्राह्मण सुमंतु की पुत्री शीला का विवाह कौंडिन्य मुनि से हुआ. एक दिन शीला ने नदी के किनारे कुछ स्त्रियों को अनंत चतुर्दशी का व्रत करते हुए देखा और व्रत के बारे में जानना चाहा. उन स्त्रियों ने उसे व्रत का विधान बताया – भगवान विष्णु को नैवेद्य अर्पित करना, उन्हें गन्ध, पुष्प, धूप, दीप आदि उपचारों से पूजा करना और चौदह ग्रन्थियुक्त दोरक भगवान को अर्पित करना. दोरक को कुंकुमादि से चर्चित कर पुरुष दाहिने हाथ में और स्त्री बायें हाथ में बांधना चाहिए.
शीला ने भी विधि से अनंत चतुर्दशी का व्रत किया और दोरक बांधा. इसके बाद उसका घर धन-धान्य एवं गोधन से सम्पन्न हो गया.
लेकिन, कुछ समय बाद कौंडिन्य ने क्रोध में आकर शीला के हाथ से अनंत दोरक तोड़ दिया. इसके परिणामस्वरूप उनका सारा धन-धान्य नष्ट हो गया और उनका घर दरिद्रता से भर गया. दुखी होकर कौंडिन्य ने पुनः भगवान अनंत का व्रत किया और ब्रह्मचर्य का पालन किया. अंत में भगवान अनंत ने उन्हें दर्शन दिए और उन्हें कहा कि वे घर जाकर अनंत चतुर्दशी का व्रत करें.
कौंडिन्य और शीला ने व्रत का पालन किया और फिर से धर्मात्मा होकर सुख प्राप्त किया.
यह कहा जाता है कि जो व्यक्ति इस व्रत को करता है या इस कथा को सुनता है, वह भी भगवान के स्वरूप में मिल जाता है.