Thu Nov 14 23:57:10 UTC 2024: ## गुरु नानक देव जी: मानवता के प्रणेता, विश्व के गुरु

**जोधपुर:** गुरु नानक देव जी, जो केवल सिक्ख धर्म के ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के गुरु थे, आज भी अपने सच्चे और पवित्र जीवन के लिए याद किए जाते हैं। उनके जीवन और उपदेशों में मानवता का संदेश सर्वोच्च था।

गुरु नानकदेव जी का जन्म एक ऐसे समय में हुआ जब भारत विदेशी आक्रांताओं के शासन के अधीन था और धर्म के ठेकेदारों का बोलबाला था। उन्होंने अपने उपदेशों के माध्यम से समाज में व्याप्त अंधियारे को दूर करने का प्रयास किया और लोगों को एक नई दिशा दी।

गुरु नानक देव जी ने अपनी शिक्षा बीच में ही छोड़ दी थी क्योंकि उन्हें विद्वान बनने की इच्छा नहीं थी। वे मानवता को सर्वोच्च स्थान पर रखते थे और जीवन में जो अनुभव किया, उसका सरल और सहज ढंग से वर्णन किया।

उनके जीवन में कई किस्से और प्रसंग हैं जो उनकी महानता का प्रमाण देते हैं। एक बार उन्होंने व्यापार के लिए मिले सारे पैसे भूखे-प्यासे लोगों पर खर्च कर दिए थे। बादशाह के भंडार में भी उन्होंने गिनती करते-करते 13 पर रुककर कहा, “तेरा, तेरा, तेरा”, यह कहते हुए कि सबका हक़ बराबर है। बादशाह की जांच में सामान पूरा मिला, जिससे गुरु नानक देव जी की ईमानदारी और उदारता का प्रमाण मिला।

गुरु नानक देव जी का जीवन ईमानदारी, मेहनत, और मानवता से भरा था। वे गरीबों, ज़रूरतमंदों, पीड़ितों, बीमारों और बेसहारा महिलाओं के प्रति बेहद स्नेह रखते थे। उन्होंने हिन्दू और मुस्लिमों को एक मंच पर लाने का सतत् प्रयास किया और दोनों ही कौमों के ग्रंथों को गुरुबाणी में शामिल किया।

आज भी गुरु नानक देव जी के उपदेश प्रासंगिक हैं। दुनिया में अहिंसा और मानवता का संदेश फैलाना, जातिवाद और क्षेत्रवाद से मुक्त होना, सच्चे गुरुओं के आदर्शों को अपनाना – ये सभी कार्य हमें गुरु नानक देव जी के जीवन और शिक्षाओं से सीखने को मिलते हैं।

**लेखक: मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन**

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