Tue Nov 12 00:30:00 UTC 2024: ## देवउठनी एकादशी 2024: भगवान विष्णु का जागरण, विवाह समेत सभी शुभ कार्य शुरू होंगे

**नई दिल्ली:** हिंदू धर्म में देवउठनी एकादशी का पर्व विशेष महत्व रखता है. इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योग निद्रा से जागते हैं और इसी दिन से सभी मांगलिक कार्य शुरू होते हैं. इस साल यह पर्व 12 नवंबर, 2024 को मनाया जाएगा.

भगवान विष्णु आषाढ़ शुक्ल एकादशी को चार महीनों के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं, जिसके कारण इस दौरान कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किया जाता. देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु के जागने के साथ ही समस्त मांगलिक कार्य जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश आदि शुरू हो जाते हैं. इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और उनकी आराधना की जाती है.

**व्रत का समय:** देवउठनी एकादशी का व्रत 12 नवंबर, 2024 को रखा जाएगा और इसका पारण 13 नवंबर को होगा.

**व्रत के नियम:** इस दिन निर्जल या जलीय पदार्थों पर उपवास रखना चाहिए. रोगी, वृद्ध, बालक या व्यस्त व्यक्ति एक वेला का उपवास रखकर फलाहार कर सकते हैं. इस दिन चावल और नमक का सेवन नहीं करना चाहिए. भगवान विष्णु या अपने ईष्ट देव की पूजा करनी चाहिए और ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करना चाहिए.

**गलतियाँ:** देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी नहीं तोड़नी चाहिए. तुलसी माता को लाल चुनरी जरूर चढ़ाएं और उनके नीचे दीया जलाएं. इस दिन चावल का सेवन न करें. मन शांत रखें और घर में सुख-शांति का सद्भाव बनाए रखें. घर में तामसिक आहार जैसे प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा या बासी भोजन का सेवन न करें.

**पूजा विधि:** घर में गन्ने का मंडप बनाएं. बीच में चावल के आटे से एक चौक बनाएं. चौक के मध्य में चाहें तो भगवान विष्णु का चित्र या मूर्ति रख सकते हैं. चौक के साथ ही भगवान के चरण चिह्न बनाएं. भगवान को गन्ना, सिंघाडा और फल-मिठाई अर्पित करें. फिर भगवान के समक्ष घी का एक दीपक जलाएं, जो रात भर जलता रहता है.

**भगवान को जगाना:** इस समय शंखा, घंटी और भजन कीर्तन की आवाज से भगवान को जगाया जाता है. कुछ जगहों पर लोग थाली बजाकर या सूप पीटकर भी भगवान को जगाते हैं. इसके बाद व्रत-उपवास की कथा सुनी जाती है और अंतत: सारे मंगल कार्य शुरू किए जा सकते हैं.

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