Mon Nov 11 05:47:17 UTC 2024: ## राष्ट्रीय शिक्षा दिवस: बहु-सांस्कृतिक शिक्षा की ज़रूरत

राष्ट्रीय शिक्षा दिवस केवल औपचारिक कार्यक्रमों से परे, ‘राष्ट्र’, ‘शिक्षा’ और ‘राष्ट्रीय शिक्षा’ पर जन विमर्श को प्रोत्साहित करता है। इस दिन, कोठारी आयोग के शब्द, “भारत के भविष्य का निर्माण कक्षाओं में हो रहा है”, विशेष महत्व रखते हैं।

आज के भारत के सामने, 19वीं सदी में राष्ट्रवाद के निर्माण के समान सवाल हैं: राष्ट्रवादी नागरिक कैसे बनाए जाएं? क्या ‘स्कूलीकरण’ से राष्ट्रवाद को आत्मसात किया जा सकता है? राष्ट्र की कौन सी अवधारणा पढ़ाई जाए? तकनीकी प्रगति और वैश्वीकरण के युग में, राष्ट्रवाद कैसे पढ़ाया जाए?

विभिन्न संस्कृतियों के सामने आने पर, वर्चस्व के बजाय ‘नई’ संस्कृति का निर्माण संभव है। इस संदर्भ में, बहु-सांस्कृतिक शिक्षा क्यों महत्वपूर्ण है? स्कूल ‘अन्य’ से परिचय कराता है और सद्भाव और सम्मान सिखाता है।

भारत जैसे बहु-भाषी, बहु-धर्मी राष्ट्र में, शिक्षा की एकरूपता खतरनाक होगी। भिन्नता और विभिन्न प्रस्थान बिंदुओं से उत्पन्न ज्ञान को समझना और स्वीकार करना आवश्यक है। बहु-सांस्कृतिक शिक्षा न केवल शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बढ़ावा देती है, बल्कि ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ और ‘संगच्छध्वम संवदध्वम’ के आदर्शों को साकार करने में भी मदद करती है।

बहु-सांस्कृतिक समाज आधुनिक युग की आवश्यकता है। सह-अस्तित्व और सबके विकास के लिए बहु-सांस्कृतिक शिक्षा महत्वपूर्ण है। समावेशी शिक्षा और सीखने के सार्वभौमिक स्वरूप के दर्शन को पूरा करने के लिए, बहुलता और बहु-सांस्कृतिकता को समाहित करना आवश्यक है।

भारत जैसे विविधतापूर्ण राष्ट्र में, बहु-सांस्कृतिकता को अपनाना ही एकता के लिए आवश्यक है। स्कूली पाठ्यपुस्तकों से लेकर मूल्यांकन प्रक्रियाओं तक, इस विविधता को शामिल करना चाहिए। कुछ संस्कृतियों का वर्चस्व स्थापित करने की ललक को रोकना होगा।

बहु-सांस्कृतिकता केवल विभिन्न संस्कृतियों का ‘फ्यूजन’ नहीं है, बल्कि एक नई संस्कृति का निर्माण है। ‘फ्यूजन’ में आने वाली 21वीं सदी और उसके आगे की सदियों का गर्भ है।

राष्ट्रीय शिक्षा दिवस पर, हमें ‘एक’ होना चाहिए, घुलना-मिलना चाहिए और सभी को समाहित करना चाहिए। बहु-सांस्कृतिक शिक्षा और समाज ही हमारा भविष्य है।

**इसके अलावा, समाचार लेख में जस्टिस संजीव खन्ना के 51वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ लेने की जानकारी शामिल होनी चाहिए।**

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