Mon Nov 11 10:45:52 UTC 2024: ## जम्मू-कश्मीर: 370 का समापन और भविष्य

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 370 को समाप्त करने को पूर्णतः संवैधानिक व वैध करार दिया है, जिसके बाद जम्मू-कश्मीर को फिर कभी विशेष राज्य का दर्जा नहीं मिल सकता। यह फैसला 5 अगस्त 2019 को संसद द्वारा पारित प्रस्ताव पर आधारित है जिसने जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित क्षेत्रों में विभाजित किया और अनुच्छेद 35(ए) को समाप्त किया।

अनुच्छेद 370 के जम्मू-कश्मीर में लागू होने की कहानी 1947 के विभाजन से जुड़ी है। महाराजा हरिसिंह ने अपनी रियासत को स्वतंत्र रखना चाहा था लेकिन पाकिस्तान के हमले के बाद भारत से मदद मांगी। इस घटना के बाद जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय 26 अक्टूबर 1947 को हुआ।

अनुच्छेद 370 और 35(ए) के समर्थक यह तर्क देते हैं कि यह जम्मू-कश्मीर की विशिष्ट परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लाया गया था। हालाँकि, विरोधी दलों का कहना है कि इन प्रावधानों ने जम्मू-कश्मीर में अलगाववाद को बढ़ावा दिया और भारत के संपूर्ण एकीकरण में बाधा डाली।

अब जब सर्वोच्च न्यायालय ने 370 के समापन को मान्यता दे दी है, तो यह मुद्दा अब राजनीतिक बहस का विषय नहीं रह गया है।

जम्मू-कश्मीर के भविष्य के लिए अब केंद्र सरकार की योजनाओं पर निर्भर करता है। राज्य को पूर्ण राज्य का दर्जा देने का वादा किया गया है, लेकिन कब और कैसे यह होगा, यह स्पष्ट नहीं है।

भारत सरकार का लक्ष्य जम्मू-कश्मीर में शांति और विकास लाना है, और उम्मीद है कि 370 के समापन से इस लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

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