Mon Nov 11 11:24:25 UTC 2024: ## धारा 370 खत्म, लेकिन धारा 371 अभी भी है: जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए विशेष प्रावधानों पर नज़र
**नई दिल्ली**: 5 अगस्त 2019 को धारा 370 को खत्म करने के बाद से जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मिल गया था। हालाँकि, अब इसे फिर से राज्य का दर्जा दे दिया गया है। धारा 370 जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाला एक अस्थायी प्रावधान था, जो इसे भारत के संविधान से अलग पहचान देता था। इस धारा के कारण जम्मू-कश्मीर को आंतरिक स्वायत्तता प्राप्त थी और भारतीय संसद के कई कानूनों का इस प्रदेश पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता था। जम्मू-कश्मीर का अपना अलग संविधान, प्रधानमंत्री और झंडा भी था।
हालाँकि, धारा 370 खत्म होने के बाद भी धारा 371 कई राज्यों की जनता को विशेष अधिकार और संरक्षण प्रदान करती है। धारा 371 पूर्वोत्तर राज्यों को विशेष दर्जा देता है, हालांकि इसके प्रावधान जम्मू-कश्मीर से अलग हैं।
**नागालैंड:** धारा 371(A) के तहत नागालैंड को तीन विशेष अधिकार दिए गए हैं:
* नगा समुदाय के सांस्कृतिक और धार्मिक मामलों में भारत के किसी भी कानून का प्रभाव नहीं होगा।
* नगा लोगों के खिलाफ आपराधिक मामलों में केवल राज्य के कानून के तहत सजा दी जा सकती है। संसद के कानून और सुप्रीम कोर्ट का आदेश भी इन पर लागू नहीं होता है।
* नागालैंड में कोई भी बाहरी व्यक्ति जमीन नहीं खरीद सकता, हालाँकि वो अपनी इच्छानुसार यहां रह सकता है।
धारा 371 महाराष्ट्र, गुजरात और अन्य राज्यों में भी कुछ खास जगहों पर लोगों को विशेष अधिकार प्रदान करती है।
**धारा 370 और 371 के बीच अंतर:**
* धारा 370 जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाला एक अस्थायी प्रावधान था जो अब खत्म हो गया है।
* धारा 371 कई राज्यों को कुछ खास अधिकार और संरक्षण प्रदान करती है, जिसमें पूर्वोत्तर राज्य शामिल हैं।
* धारा 371 के प्रावधान जम्मू-कश्मीर में लागू धारा 370 से अलग हैं।