Thu Nov 07 19:06:04 UTC 2024: ## राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ की 148वीं जयंती मनाई गई
**नई दिल्ली:** आज 7 नवंबर को भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ की 148वीं जयंती मनाई जा रही है। इस ऐतिहासिक गीत की रचना प्रसिद्ध भारतीय उपन्यासकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 7 नवंबर 1876 को की थी।
पहली बार इस गीत को उसी दिन बंगाल के कांताल पाडा गांव में गाया गया था। 1896 में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में इसे पहली बार व्यापक रूप से गाया गया था। ‘वंदे मातरम’ ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लोगों को आज़ादी की लड़ाई के लिए प्रेरित किया।
यह गीत बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंद मठ’ का भी हिस्सा है। मूलरूप से गीत के प्रारंभिक दो पद संस्कृत में थे, जबकि शेष गीत बांग्ला भाषा में है। अरविंद घोष ने इसका पहला इंग्लिश ट्रांसलेशन किया था।
दिसंबर 1905 में कांग्रेस कार्यकारिणी की मीटिंग में इसे राष्ट्रगीत का दर्जा प्रदान किया गया। बंग भंग आंदोलन में ‘वंदे मातरम्’ राष्ट्रीय नारा भी बन गया।
साल 1923 के कांग्रेस अधिवेशन में गीत के विरोध के बाद, जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस, मौलाना अब्दुल कलाम अजाद और आचार्य नरेन्द्र देव की समिति ने 28 अक्टूबर 1937 को कलकत्ता अधिवेशन में अपनी रिपोर्ट पेश की। इस रिपोर्ट के बाद राष्ट्रगीत के गायन की अनिवार्यता को खत्म कर दिया गया और कहा गया कि गीत के शुरुआती दो पद ही प्रासंगिक हैं।
आजादी के बाद 1950 में ‘वंदे मातरम’ को आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय गीत और ‘जन गण मन’ को राष्ट्रीय गान घोषित किया गया। बीबीसी के एक सर्वे के मुताबिक ‘वंदे मातरम’ दुनिया का दूसरा सबसे लोकप्रिय गीत है।