Tue Nov 05 10:05:35 UTC 2024: ## सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा अधिनियम को दिया मान्यता, लेकिन डिग्री देने पर लगाई रोक
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा अधिनियम 2004 को मान्यता दे दी है, लेकिन मदरसों को डिग्री प्रदान करने से रोक दिया है. यानी मदरसे अब भी बच्चों को बारहवीं तक की शिक्षा प्रदान कर सकते हैं, लेकिन फाजिल (पोस्ट ग्रेजुएशन) और कामिल (अंडर ग्रेजुएशन) नाम की डिग्रियां नहीं दे पाएंगे. सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले में कहा कि ये डिग्रियां यूजीसी नियमों का उल्लंघन करती हैं.
मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि मदरसा एक्ट राज्य विधानसभा की विधायी शक्ति के अंतर्गत है. हालांकि, मदरसा एक्ट के उन प्रावधानों को असंवैधानिक करार दिया गया जो फाजिल और कामिल जैसी उच्च शिक्षा की डिग्रियों को विनियमित करने का प्रयास करते हैं.
उत्तर प्रदेश सरकार ने भी मदरसा बोर्ड की ग्रेजुएशन और पोस्ट-ग्रेजुएशन की पढ़ाई पर सवाल उठाए थे, क्योंकि इन डिग्रियों के आधार पर युवाओं को नौकरी नहीं मिल पाती है. राज्य सरकार का तर्क था कि मदरसों की ओर से दी जाने वाली फाजिल और कामिल की डिग्री न तो विश्वविद्यालय की डिग्री के बराबर है और न ही बोर्ड की ओर से पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रमों के समकक्ष.
गौरतलब है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 22 मार्च को यूपी बोर्ड ऑफ मदरसा एजुकेशन एक्ट 2004 को असंवैधानिक बताते हुए कहा था कि इससे धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत का उल्लंघन होता है. उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को सामान्य शिक्षा प्रणाली में शामिल करने का भी आदेश दिया था. इस फैसले को चुनौती देने के लिए अंजुमन कादरी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.