Mon Oct 21 10:03:13 UTC 2024: मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी वाई चंद्रचूड़ ने गोवा में एक कार्यक्रम के दौरान महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक भाषा के उपयोग पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि न्यायालयों में ऐसी भाषा का कोई स्थान नहीं है और यह महिलाओं तथा हाशिए पर पड़े समुदायों को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकती है।
**मुख्य बिंदु:**
1. **असंवेदनशील भाषा का विरोध**: CJI ने न्यायालयों में सभी प्रकार की अपमानजनक भाषा, विशेषकर महिलाओं के प्रति, के खिलाफ आगाह किया।
2. **समावेशिता और सम्मान**: उन्होंने कहा कि इस्तेमाल की जाने वाली भाषा में समावेशिता, सम्मान, और सशक्तिकरण का ध्यान रखना चाहिए।
3. **महिला न्यायिक अधिकारियों की शिकायतें**: CJI ने महिला न्यायिक अधिकारियों द्वारा जताई गई शिकायतों का उल्लेख किया, जिनमें प्रशासनिक प्रतिष्ठान के सदस्यों द्वारा अपमानजनक भाषा के उपयोग की समस्या थी।
4. **कानूनी भाषा में सुधार**: CJI ने कानूनी शब्दावली की समीक्षा करने की आवश्यकता पर जोर दिया ताकि यह लिंग, जाति या सामाजिक स्थिति के आधार पर रूढ़िवादिता को मजबूत न करे।
5. **भाषाई समावेशिता**: CJI ने यह सुनिश्चित करने की बात की कि न्यायालय के आदेश विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध हों, उदाहरण के लिए कोंकणी में अनुवाद की प्रक्रिया की जा रही है।
6. **ईमानदार न्यायालय की अवधारणा**: CJI ने यह कहा कि न्यायालय सामाजिक वास्तविकताओं से भली-भांति परिचित हैं और कानून अंधा नहीं है, बल्कि सभी को समान रूप से देखता है।
7. **न्याय की देवी की प्रतिमा का संदर्भ**: CJI ने न्याय की देवी की प्रतिमा के परिवर्तन का उल्लेख करते हुए निष्पक्षता का संकेत दिया।
8. **समानता की परिभाषा**: उन्होंने बताया कि कानून की समानता केवल औपचारिक भावना नहीं, बल्कि सुरक्षा देने वाली ठोस मान्यता है, जो ऐतिहासिक क्षति और समुदायों के अनुभव को संबोधित करती है।
CJI चंद्रचूड़ ने इस बात पर बल दिया कि न्यायालयों में उपयोग की जाने वाली भाषा और प्रशासनिक प्रक्रियाएं हर व्यक्ति के अनुभव और संघर्ष को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए।