
Tue Oct 15 02:17:25 UTC 2024: ## “मिसाइल मैन” से “जनता के राष्ट्रपति” तक: डॉ. कलाम का जीवन और बलिदान
**नई दिल्ली:** भारत के पूर्व राष्ट्रपति और प्रसिद्ध वैज्ञानिक, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, जिन्हें “मिसाइल मैन” के नाम से जाना जाता था, अपने असाधारण जीवन और देश के प्रति समर्पण के लिए याद किए जाते हैं। हालाँकि, उनके नाम के साथ हमेशा के लिए जुड़ी इस उपाधि के अलावा, उन्हें “जनता के राष्ट्रपति” के रूप में भी जाना जाता है।
अपनी आत्मकथा में डॉ. कलाम ने अपने जीवन के विभिन्न पहलुओं, जिसमें उनकी सफलताएँ और नाकामियाँ शामिल हैं, को खुलकर बताया है। उन्होंने लिखा है कि “मिसाइल मैन” के रूप में संबोधित किया जाना उन्हें अच्छा लगता था और राष्ट्रपति के पद के बाद भी यह उपाधि उनके साथ रही।
डॉ. कलाम ने अपनी सफलता की कहानी को इस तरह से प्रस्तुत किया है कि यह किसी पुस्तक की कहानी जैसी लगती है, जिससे उन्होंने खुद को उस छोटे बच्चे की तरह पाया जो जीवन के रास्ते की खोज में है। उन्होंने अपनी आत्मकथा में देश के लिए अपने समर्पण और बलिदान का भी वर्णन किया है।
उन्होंने बताया है कि कैसे उन्होंने SLV-3 सेटेलाइट लांच व्हीकल और पहली स्वदेशी मिसाइल ‘अग्नि’ के प्रोजेक्ट टीम का नेतृत्व किया, और कैसे सरकार और जनता की आशाओं के बीच उन पर भारी दबाव था। उन्होंने अपने जीवन में कई कठिन परिस्थितियों का सामना किया, जिसमें असफलताएं, चुनौतियाँ और यहां तक कि जीवन के लिए खतरा भी शामिल था।
1960 के दशक में थुंबा में ध्वनि रॉकेट के लिए पेलोड तैयार करने के दौरान, एक वैज्ञानिक परीक्षण के दौरान डॉ. कलाम की जान खतरे में पड़ गई थी। उनके सहयोगी सुधाकर ने उनकी जान बचाने के लिए खुद को खतरे में डाल दिया था। उस हादसे में पूरी प्रयोगशाला आग की भेंट चढ़ गई थी। इस घटना ने डॉ. कलाम के जीवन पर गहरा प्रभाव डाला और उन्हें अपने काम के प्रति और भी समर्पित बना दिया।
डॉ. कलाम ने 11 जनवरी 1999 को हुए एक दुखद विमान हादसे को भी कभी नहीं भुलाया, जिसमें आठ वैज्ञानिकों की जान चली गई थी। इस घटना के बाद उन्हें बहुत दुख हुआ और उन्होंने उन विधवाओं और परिवारों की पीड़ा को समझने की कोशिश की, जिनसे उन्होंने सवाल किया था, “आपने हमारे साथ ऐसा क्यों किया?” डॉ. कलाम ने इस घटना को देश के लिए किए गए बलिदानों का प्रतीक बताया और कहा कि हम देश निर्माण के लिए किए गए कठिन परिश्रम और बलिदानों को कभी नहीं भूलना चाहिए।
राष्ट्रपति बनने के बाद, डॉ. कलाम ने देश के हर हिस्से की यात्रा की, जिससे वे जनता से जुड़ सके और उनके जीने के ढंग और समस्याओं को समझ सके। उनकी सक्रियता और जनता के प्रति समर्पण ने उन्हें “जनता के राष्ट्रपति” का दर्जा दिलाया।
डॉ. कलाम का जीवन, एक प्रेरणा है, जो हमें सफलता के लिए कड़ी मेहनत और बलिदान करने, साथ ही जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना करने का प्रोत्साहन देता है। वे अपने काम के प्रति समर्पण, देश के प्रति प्रेम और जीवन के प्रति उत्साह के लिए हमेशा याद किए जाएँगे।