
Sat Oct 05 19:07:18 UTC 2024: ## मां चंद्रघंटा की पूजा: नवरात्रि के तीसरे दिन का महत्व
**नई दिल्ली:** शारदीय नवरात्रि का तीसरा दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप, मां चंद्रघंटा की पूजा के लिए समर्पित है। मां चंद्रघंटा की पूजा करने से व्यक्ति के अंदर का भय समाप्त हो जाता है और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। साथ ही कुंडली में शुक्र की स्थिति मजबूत होती है।
मां चंद्रघंटा को सफेद फूलों की माला पहने हुए और बाघ की सवारी करती हुई चित्रित किया जाता है। उनकी दस भुजाओं में कमल, धनुष, बाण, खड्ग, कमंडल, तलवार, त्रिशूल और गदा जैसे शस्त्र हैं। मां के सिर पर अर्ध चंद्र होने के कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है।
**मां चंद्रघंटा की व्रत कथा:**
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब महिषासुर ने तीनों लोकों में आतंक मचाना शुरू कर दिया, तो देवताओं ने ब्रह्मा, विष्णु और महेश से मदद मांगी। तीनों देवताओं के क्रोध से उत्पन्न ऊर्जा से देवी चंद्रघंटा का प्रादुर्भाव हुआ। भगवान शंकर ने उन्हें त्रिशूल, भगवान विष्णु ने चक्र, इंद्र ने घंटा, सूर्य ने तेज, तलवार और सिंह प्रदान किया। सभी देवताओं ने मां को अपने-अपने अस्त्र प्रदान किए।
मां चंद्रघंटा ने महिषासुर का वध करके देवताओं को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई।
**नवरात्रि के तीसरे दिन का रंग:**
नवरात्रि के तीसरे दिन हरे रंग के कपड़े पहनने की परंपरा है। यह प्रकृति का रंग है जिसका खास महत्व है।
**शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन, मां चंद्रघंटा की पूजा करने से शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभ मिलता है।**