Sun Sep 29 08:14:55 UTC 2024: ## खुश रहने से हृदय रोग का खतरा कम!

नई दिल्ली: एक ताजा शोध में पता चला है कि खुशहाल और संतुष्ट जीवन हृदय रोग और स्ट्रोक के खतरे को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य का सीधा संबंध हृदय स्वास्थ्य से है।

चीन की यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी ऑफ चाइना के स्ट्रोक सेंटर के एसोसिएट डायरेक्टर और वरिष्ठ लेखक वेन सन ने बताया कि जीवन में संतुष्टि और खुशियां स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करती हैं। नियमित व्यायाम, तनाव प्रबंधन और सामाजिक गतिविधियों में शामिल होने से इन भावनाओं को विकसित किया जा सकता है।

इस अध्ययन में यूके बायो बैंक डेटाबेस में 120,000 से अधिक प्रतिभागियों को शामिल किया गया, जिनसे उनके परिवार, दोस्त, स्वास्थ्य, वित्त और खुशियों से जुड़े सवाल पूछे गए। शोधकर्ताओं ने चार प्रमुख हृदय संबंधी बीमारियों – कोरोनरी हार्ट डिजीज, हार्ट अटैक, हार्ट फेल और स्ट्रोक – के विकास के साथ स्वास्थ्य के संभावित संबंध का अध्ययन किया।

शोध में पाया गया कि खुद की देखभाल करने वाले और खुश रहने वाले लोगों में हृदय रोग विकसित होने का खतरा दुखी और लापरवाही करने वालों की तुलना में 10% से 21% कम था। भावनात्मक रूप से मजबूत लोगों में कोरोनरी आर्टरी डिजीज का खतरा 44% कम और स्ट्रोक का खतरा लगभग 45% तक कम पाया गया। अध्ययन के अनुसार, खुश रहने वाले लोगों में परेशान रहने वालों की तुलना में हार्ट फेल का खतरा 51% कम और दिल के दौरे का खतरा 56% तक कम होता है।

इस शोध से यह स्पष्ट होता है कि खुश रहने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सकता है और कई जानलेवा बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है।

एनआईएचएस के अनुसार, शोध बताते हैं कि मानसिक स्वास्थ्य का हृदय पर सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह का प्रभाव पड़ता है। खुशी से हृदय स्वस्थ रहता है, जबकि तनाव से इसकी समस्याएं बढ़ सकती हैं। बायलर कॉलेज ऑफ मेडिसिन के प्रोफेसर ग्लेन एन. लेविन ने बताया कि अक्सर लोग तनाव, अवसाद और चिंता पर ध्यान नहीं देते हैं, लेकिन अध्ययन के अनुसार ये हृदय संबंधी जोखिम बढ़ाते हैं। इसलिए व्यक्ति को अपनी शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए।

**डिस्क्लेमर:** यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

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