Fri Sep 20 12:16:37 UTC 2024: ## विदर्भ: महाराष्ट्र चुनावों का नया युद्धभूमि

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा से पहले ही राजनीतिक तापमान चरम पर पहुंच गया है। सत्ताधारी महायुति और विपक्षी महा विकास अघाड़ी के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर खींचतान चल रही है। साथ ही, दोनों खेमे लोकसभा चुनाव के नैरेटिव को आगे बढ़ाने और काटने की जंग में लगे हुए हैं, और इस लड़ाई का मुख्य अखाड़ा बन गया है विदर्भ।

महा विकास अघाड़ी (एमवीए) विदर्भ में लोकसभा चुनाव के नतीजों का ट्रेंड आगे बढ़ाने की कोशिश में जुटा है, जबकि महायुति ने इस रीजन में अपनी सबसे बड़ी हस्ती, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, को मैदान में उतार दिया है। पीएम मोदी एक महीने के भीतर तीसरी बार महाराष्ट्र आ रहे हैं और वर्धा और अमरावती में आयोजित कार्यक्रमों में शामिल होंगे। वर्धा से आचार्य चाणक्य कौशल विकास योजना और अहिल्याबाई होल्कर महिला स्टार्टअप स्कीम की शुरुआत करेंगे। पीएम मोदी के बाद गृह मंत्री अमित शाह भी विदर्भ दौरे पर रहेंगे और नागपुर में बीजेपी के पदाधिकारियों की बैठक को संबोधित करेंगे।

बीजेपी की इस सक्रियता से विपक्षी गठबंधन के कान खड़े हो गए हैं। यह सवाल उठ रहा है कि चुनाव कार्यक्रम की घोषणा से पहले ही बीजेपी अपने शीर्ष नेताओं को विदर्भ में क्यों उतार रही है?

बीजेपी के शीर्ष नेताओं के ताबड़तोड़ दौरों के पीछे लोकसभा चुनाव के ट्रेंड को भी एक बड़ी वजह बताया जा रहा है। विदर्भ रीजन में विधानसभा की 62 सीटें हैं। बीजेपी की अगुवाई वाले गठबंधन को 2019 के विधानसभा चुनावों में 42 सीटों पर जीत मिली थी, लेकिन हालिया लोकसभा चुनाव में उनकी लीड घटकर 22 सीटों तक रह गई। दूसरी तरफ, विपक्षी गठबंधन ने 35 सीटों पर बढ़त हासिल की थी।

बीजेपी के चुनाव कार्यक्रम के ऐलान से पहले ही सक्रियता बढ़ाने के पीछे एक वजह गठबंधनों का बदला गणित भी है। शिवसेना के साथ हुए गठबंधन में उद्धव ठाकरे के ना होने से होने वाले नुकसान की भरपाई शिंदे और अजित पवार की पार्टी से करने का प्लान लोकसभा चुनाव में फेल साबित हुआ।

ऐसे में बीजेपी विधानसभा चुनाव में कोई ढील नहीं छोड़ना चाहती। पार्टी पीएम मोदी को मैदान में उतार जनता के बीच माहौल बनाने की कोशिश कर रही है, साथ ही अमित शाह जैसे कुशल संगठनकर्ता और रणनीतिकार को मोर्चे पर लाकर संगठन के पेच कसने में जुटी है।

महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का भी मजबूत स्थान रहा है। ये दोनों ही दल पैन महाराष्ट्र समान पकड़ नहीं रखते, शिवसेना मुंबई-ठाणे रीजन में मजबूत रही है तो वहीं एनसीपी का गढ़ पश्चिमी महाराष्ट्र और मराठवाड़ा जैसे इलाके रहे हैं। सूबे की सत्ता पर कौन सी पार्टी काबिज होगी, इसका निर्णय विदर्भ के मतदाताओं का रुख ही करेगा। इस रीजन में बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला होता आया है।

विदर्भ बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा से जुड़ा रीजन है, क्योंकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुख्यालय नागपुर भी इसी रीजन में है। महाराष्ट्र बीजेपी के सबसे बड़े चेहरे, देवेंद्र फडणवीस और नितिन गडकरी जैसे कई बड़े नेता इसी रीजन से आते हैं। अगर बीजेपी इस रीजन में हार गई तो उसे काफी किरकिरी का सामना करना पड़ेगा।

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