Wed Sep 18 03:09:51 UTC 2024: ## श्राद्ध पक्ष शुरू: पितृ तर्पण और श्राद्ध कर्म से शुरू हुआ 15 दिनों का पर्व
**रांची:** भारतीय संस्कृति में दिवंगत पूर्वजों की आत्मा की तृप्ति और उनके प्रति श्रद्धा से जुड़ा पर्व श्राद्ध मंगलवार को शुरू हो गया। इस बार श्राद्ध पक्ष अनंत चतुर्दशी के दिन मंगलवार से शुरू हुआ है और 2 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या पर समाप्त होगा।
श्राद्ध पक्ष के पहले दिन, पूर्णिमा के श्राद्ध के अवसर पर, जलसरोवरों में पितरों का तर्पण किया गया। सनातन धर्म के अनुसार, श्राद्ध पक्ष के दौरान पिंडदान और तर्पण करने से पितृ ऋण चुकाने का फल मिलता है।
पंडितों ने बताया कि श्राद्ध तिथि मध्याह्न काल में स्पर्श करने वाली तिथि के अनुसार होता है। पूर्णिमा का श्राद्ध मंगलवार को मनाया गया, और बुधवार को प्रतिपदा का श्राद्ध होगा।
इस बार के श्राद्ध पक्ष में तिथियों का भुग्तभोग्य होने के कारण 27 को एकादशी और 29 को द्वादशी का श्राद्ध किया जाएगा।
पितृ पक्ष में, दिवंगत पूर्वजों की उनकी मृत्यु की तिथि के अनुसार श्राद्ध किया जाता है। अगर किसी मृत व्यक्ति की तिथि ज्ञात न हो, तो अमावस्या तिथि पर श्राद्ध किया जाता है। इस दिन को सर्वपितृ श्राद्ध योग माना जाता है।
मान्यता है कि भाद्रपद की पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक चलने वाले पितृपक्ष में श्राद्ध कर्म और तर्पण करने से पितरों को शांति और मुक्ति मिलेगी। इस दौरान लोग अपने पितरों की शांति के लिए श्रद्धानुसार दान दक्षिणा देकर ब्राह्मण भोज करवाते हैं।
**मांगलिक कार्यों पर रोक**
ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि पितरों के लिए समर्पित श्राद्ध पक्ष में कोई भी शुभ काम नहीं होता है। इस दौरान गृह प्रवेश, कानछेदन, मुंडन, शादी-विवाह नहीं कराए जाते हैं। इसके साथ ही इन दिनों में न कोई नया कपड़ा खरीदा जाता और न ही नया कपड़ा पहना जाता है। श्राद्ध पक्ष में पितरों के लिए हर दिन खाना निकाला जाता है। ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है। कौवों और गायों को रोटी खिलाई जाती है।