Mon Sep 16 12:42:59 UTC 2024: ## विश्वकर्मा जयंती: सृष्टि के शिल्पकार की पूजा से आर्थिक समृद्धि

**नई दिल्ली:** सनातन धर्म में भगवान विश्वकर्मा, सृष्टि के प्रथम शिल्पकार, को विशेष महत्व दिया जाता है। धर्म शास्त्रों के अनुसार, हर साल कन्या संक्रांति के दिन विश्वकर्मा पूजा का पर्व मनाया जाता है। मान्यता है कि उनकी उपासना से आर्थिक और व्यवसायिक क्षेत्र में उन्नति होती है।

भगवान विश्वकर्मा को स्वर्ग लोक, पुष्पक विमान, कुबेरपुरी जैसे देवनगरी का रचनाकार माना जाता है। कन्या संक्रांति के दिन उनकी जयंती का त्योहार उत्साह से मनाया जाता है। इस दिन लोग उनकी विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करते हैं, मिठाई और फल का भोग लगाते हैं और गरीबों को दान करते हैं। कथा का पाठ करने से साधक को व्यावसायिक क्षेत्र में सफलता मिलती है।

पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु के नाभि कमल से ब्रह्मा जी उत्पन्न हुए। ब्रह्मा जी के पुत्र वास्तुदेव थे और उनके सातवें पुत्र ऋषि विश्वकर्मा थे। ऋषि विश्वकर्मा वास्तुकला के आचार्य बनें। धार्मिक मान्यता है कि उन्होंने भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र, पांडवों की इंद्रप्रस्थ नगरी, भगवान श्रीकृष्ण की द्वारका नगरी, इंद्र का व्रज और सोने की लंका का निर्माण किया था।

पंचांग के अनुसार, 16 सितंबर को सूर्य देव शाम को 07 बजकर 53 मिनट पर कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। इस प्रकार 16 और 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा का पर्व मनाया जाएगा।

**विश्वकर्मा जयंती पर यह मंत्र का जाप करें:**

* नमस्ते विश्वकर्माय, त्वमेव कर्तृता सदा।
* शिल्पं विधाय सर्वत्र, त्वं विश्वेशो नमो नमः।।

**नोट:** इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य ज्ञान के लिए है, दैनिक जागरण और जागरण न्यू मीडिया इस जानकारी की पुष्टि नहीं करता है।

Read More