Mon Sep 16 09:00:47 UTC 2024: ## निपाह और मंकीपॉक्स: भारत में बढ़ता खतरा
केरल में निपाह वायरस से एक और मौत की पुष्टि हुई है, जिससे इस साल निपाह से मरने वालों की संख्या दो हो गई है। मृतक मलप्पुरम के रहने वाले थे और बेंगलुरु में इलाज करा रहे थे। इस घटना के बाद केरल प्रशासन अलर्ट पर है और मृत व्यक्ति के संपर्क में आए 151 लोगों की जांच की जा रही है, जिसमें से 5 को आइसोलेट किया गया है।
निपाह के साथ-साथ भारत में मंकीपॉक्स का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। दिल्ली में एक मरीज में मंकीपॉक्स की पुष्टि हो चुकी है। हालाँकि, केरल में इस साल अभी तक मंकीपॉक्स का कोई मामला नहीं आया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह वायरस जल्द ही भारत में फैल सकता है।
निपाह वायरस पहली बार 1998 में मलेशिया में देखा गया था। यह चमगादड़ों से इंसानों में फैलता है और इसका कोई इलाज नहीं है। मंकीपॉक्स बंदरों से इंसानों में फैलता है और शारीरिक संपर्क या संक्रमित व्यक्ति के करीब आने से फैलता है।
हालांकि, मंकीपॉक्स के लिए एक वैक्सीन उपलब्ध है, लेकिन इस वायरस का खतरा अभी भी बना हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मंकीपॉक्स को एक वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है। अफ्रीका में 40,000 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं।
लेडी हार्डिंग अस्पताल के डॉ. एलएच घोटेकर ने कहा कि केरल में पिछले कुछ वर्षों से निपाह के मामले सामने आते रहे हैं, लेकिन इतने गंभीर नहीं थे। मंकीपॉक्स के मामले में, भारत में अभी तक केवल एक ही मामला सामने आया है, और वह भी पुराने स्ट्रेन का है।
डॉ. घोटेकर ने कहा कि इन दोनों वायरस से घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी बरतना ज़रूरी है। विशेष रूप से एयरपोर्ट पर निगरानी बढ़ाना चाहिए और संदिग्ध मरीजों को आइसोलेट करना चाहिए। निपाह और मंकीपॉक्स से बचने के लिए संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से बचना चाहिए और प्रभावित क्षेत्रों की यात्रा से बचना चाहिए।