
Mon Sep 16 11:57:41 UTC 2024: ## अनंत चतुर्दशी: भगवान विष्णु और माता पार्वती की आराधना, अनंत सूत्र बांधने की परंपरा
**नई दिल्ली**: अनंत चतुर्दशी, जिसे अनंत चौदस भी कहा जाता है, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता पार्वती की आराधना की जाती है और अनंत सूत्र बांधने की परंपरा है।
इस व्रत की कहानी प्राचीन काल के ब्राह्मण सुमंत से जुड़ी है। उनकी धर्मपरायण पुत्री सुशीला का विवाह कौंडिन्य ऋषि से हुआ। सुशीला ने अनंत व्रत का अनुष्ठान किया और चौदह गांठों वाला डोरा हाथ में बांध लिया। कौंडिन्य ऋषि ने डोरे को अग्नि में डाल दिया जिससे भगवान अनंत जी का अपमान हुआ। ऋषि कौंडिन्य की सारी संपत्ति नष्ट हो गई।
पश्चाताप करते हुए ऋषि कौंडिन्य अनंत डोरे की प्राप्ति के लिए वन में गए। वहां अनंत भगवान ने उन्हें दर्शन दिए और कहा कि चौदह वर्षों तक अनंत व्रत करने से उनके दुख दूर होंगे। ऋषि कौंडिन्य ने व्रत किया और उन्हें सारे क्लेशों से मुक्ति मिल गई।
श्रीकृष्ण की आज्ञा से युधिष्ठिर ने भी अनंत व्रत किया था जिसके प्रभाव से पांडव महाभारत युद्ध में विजयी हुए।
यह व्रत कथा बताती है कि अनंत व्रत भगवान विष्णु की कृपा पाने और जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त करने का एक माध्यम है। इस दिन लोग अनंत सूत्र बांधते हैं और व्रत करते हैं।