
Mon Sep 16 11:30:18 UTC 2024: ## अनंत चतुर्दशी 2024: भगवान विष्णु की आराधना का त्योहार, व्रत कथा और महत्व
**नई दिल्ली**: अनंत चतुर्दशी, जिसे अनंत चौदस भी कहा जाता है, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। यह दिन भगवान विष्णु और माता पार्वती की आराधना के लिए समर्पित है। इस दिन अनंत सूत्र बांधने की परंपरा है, जो भगवान विष्णु की अनंत शक्ति का प्रतीक है।
इस त्योहार की व्रत कथा काफी प्रसिद्ध है। शास्त्रों के अनुसार, एक नेक ब्राह्मण सुमंत की पत्नी दीक्षा की मृत्यु के बाद, उन्होंने दूसरा विवाह किया। उनकी बेटी सुशीला का विवाह ऋषि कौंडिन्य के साथ हुआ। विदाई में, सुमंत की दूसरी पत्नी ने सुशीला को कुछ पत्थरों के टुकड़े दे दिए। रास्ते में, सुशीला ने अनंत व्रत का अनुष्ठान करते हुए कई स्त्रियों को देखा और चौदह गांठों वाला डोरा हाथ में बांध लिया।
ऋषि कौंडिन्य ने डोरे को तोड़ कर अग्नि में डाल दिया, जिससे भगवान अनंत जी का अपमान हुआ। इसके परिणामस्वरूप, ऋषि कौंडिन्य की सारी संपत्ति नष्ट हो गई। पश्चाताप करते हुए, ऋषि कौंडिन्य ने अनंत भगवान का आशीर्वाद पाने के लिए वन में तपस्या की। भगवान अनंत जी ने ऋषि कौंडिन्य को चौदह वर्षों तक अनंत व्रत करने की सलाह दी, जिससे उनका दुख दूर हुआ और उन्हें धन-धान्य से संपन्नता प्राप्त हुई।
श्रीकृष्ण की आज्ञा से, युधिष्ठिर ने भी अनंत व्रत किया था जिसके प्रभाव से पांडव महाभारत के युद्ध में विजयी हुए और चिरकाल तक राज्य करते रहे।
अनंत चतुर्दशी का त्योहार भगवान विष्णु की कृपा प्राप्ति, धन-धान्य की वृद्धि, और क्लेशों से मुक्ति का प्रतीक है।