Mon Sep 16 10:00:23 UTC 2024: ## अनंत चतुर्दशी 2024: भगवान विष्णु को समर्पित पर्व 17 सितंबर को मनाया जाएगा

**भोपाल:** हिंदू धर्म में अनंत चतुर्दशी का पर्व भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस साल, अनंत चतुर्दशी मंगलवार, 17 सितंबर 2024 को मनाया जाएगा। इस दिन गणेश चतुर्थी समाप्त होकर भगवान गणेश का विसर्जन भी होता है।

मान्यता है कि इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करने से 14 वर्षों तक अनंत फल की प्राप्ति होती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाभारत काल में पांडवों ने अनंत चतुर्दशी के दिन व्रत रखा था, जिससे उन्हें अपना खोया हुआ राजपाठ वापस मिला था।

इस वर्ष चतुर्दशी तिथि 16 सितंबर की दोपहर 3:10 बजे से 17 सितंबर की सुबह 11:44 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार, अनंत चतुर्दशी का व्रत 17 सितंबर को रखा जाएगा। पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 10:43 बजे से 11:15 बजे तक है।

**पूजा विधि:**

1. सुबह उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें।
2. गंगाजल का छिड़काव करें।
3. पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
4. भगवान विष्णु को अक्षत, फूल, इत्र, चंदन, धूप, दीप, नैवेद्य आदि चीजें अर्पित करें।
5. आरती करें।
6. भगवान विष्णु के मंत्रो का जाप करें।
7. अंत में भगवान विष्णु को अनंत सूत्र अर्पित करें।

**अनंत चतुर्दशी की कथा:**

पुराणों के अनुसार, सुमंत नामक ब्राह्मण अपनी बेटियों दीक्षा और सुशीला के साथ रहता था। सुशीला के विवाह योग्य होने पर उसकी मां का निधन हो गया। सुमंत ने अपनी पुत्री सुशीला का विवाह कौंडिन्य ऋषि से कर दिया। रास्ते में रात होने पर कौंडिन्य ऋषि सुशीला को लेकर रुक गए जहां कुछ महिलाएं अनंत चतुर्दशी का व्रत कर रही थीं। सुशीला ने व्रत की महिमा का ज्ञान प्राप्त किया और 14 गांठों वाला अनंत धागा धारण कर लिया।

कौंडिन्य ऋषि को यह अच्छा नहीं लगा और उन्होंने धागे को तोड़कर आग में डाल दिया। इसके कारण ऋषि की सारी संपत्ति नष्ट हो गई और वो दुखी रहने लगे। उन्हें लगा कि ऐसा अनंत सूत्र के अपमान के कारण हुआ है और वो उस सूत्र के लिए वन में भटकने लगे। एक दिन वे भूख-प्यास से जमीन पर गिर पड़े, तब भगवान अनंत प्रकट हुए।

प्रभु ने कहा कि कौंडिन्य तुमने अपनी भूल का पश्चाताप कर लिया है. अब घर जाकर अनंत चतुर्दशी का व्रत करो और 14 साल तक इस व्रत को करना. कौंडिन्य ऋषि ने वैसा ही किया। व्रत के प्रभाव से कौंडिन्य ऋषि का जीवन सुखमय हो गया और उनकी संपत्ति भी वापस आ गई।

अनंत चतुर्दशी पर लोग अनंत सूत्र बांधते हैं, जिसे भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए धारण किया जाता है। यह सूत्र 14 गांठों वाला होता है और इसे बाएं हाथ में धारण किया जाता है। अनंत सूत्र को बांधने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है और सभी कठिनाइयों का नाश होता है।

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