Mon Sep 16 10:00:22 UTC 2024: ## अनंत चतुर्दशी: भगवान विष्णु की आराधना का पर्व

**नई दिल्ली:** कल, 17 सितंबर को, अनंत चतुर्दशी का व्रत रखा जाएगा। यह व्रत भगवान विष्णु जी को समर्पित है और यह माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने और नारायण की आराधना करने से जीवन की परेशानियों का निवारण होता है।

अनंत चतुर्दशी को अनंत चौदस के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा करने का विधान है। यह दिन गणेश विसर्जन करने की परंपरा भी है।

**पूजा का शुभ मुहूर्त:**

दृक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 16 सितंबर को दोपहर 03:10 बजे हो रही है और समापन 17 सितंबर दोपहर 11:44 बजे होगा।

पंडित प्रभात मिश्र के अनुसार, पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 8:35 से 11:10 तक है।

**पूजा की विधि:**

* मंदिर की साफ-सफाई करें।
* विष्णु जी का पंचामृत सहित गंगाजल से अभिषेक करें।
* पीला चंदन और पीले पुष्प अर्पित करें।
* घी का दीपक प्रज्वलित करें।
* श्री विष्णु चालीसा का पाठ करें।
* गणेश जी की आरती करें।
* अंत में क्षमा प्रार्थना करें।

**अनंत सूत्र:**

पूजन के बाद 14 गांठों वाला अनंत सूत्र बांह में बांधा जाता है। कहा जाता है कि अनंत सूत्र धारण करने से हर तरह की मुसीबतों से रक्षा होती है।

**अनंत चतुर्दशी का महत्व:**

मान्यता है कि जब पांडव जुए में अपना सब कुछ हार कर वन में भटक रहे थे तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें अनंत चतुर्दशी का व्रत रखने की सलाह दी थी। उन्होंने पूरे विधि-विधान से यह व्रत किया और अनंत सूत्र बांधा था। इसके बाद उनके संकट समाप्त हुए थे।

भविष्य पुराण में वर्णित है कि वनवास के दौरान दुख से पीड़ित युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से निवृत्ति के उपाय पूछे थे। भगवान श्रीकृष्ण ने अनंत रूप की पूजा करने और 14 नामों वाली ग्रंथियों को धारण करने की सलाह दी थी।

**डिस्क्लेमर:** इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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