Fri Jan 03 11:44:15 UTC 2025: ## भारत की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की 194वीं जयंती

**पुणे, 3 जनवरी:** आज महान समाज सुधारक और भारत की पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की 194वीं जयंती है। सतारा जिले के एक दलित परिवार में जन्मी सावित्रीबाई ने उस दौर में महिला शिक्षा का बिगुल बजाया जब महिलाओं का घर से बाहर निकलना तक मुश्किल था। उन्होंने न केवल शिक्षा का प्रसार किया बल्कि जातिवाद और पितृसत्तात्मक व्यवस्था के खिलाफ भी आवाज उठाई।

सावित्रीबाई ने अपने पति ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर 1848 में पुणे में देश का पहला बालिका विद्यालय स्थापित किया। इसके बाद उन्होंने और 17 स्कूल खोले, जो सभी जातियों की लड़कियों के लिए खुले थे। इस कार्य के लिए उन्हें समाज का कड़ा विरोध झेलना पड़ा, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए वजीफा भी दिया। सामाजिक कार्य के रूप में उन्होंने दलितों के लिए कुआँ खोला, विधवा आश्रम स्थापित किया और ‘सत्यशोधक समाज’ की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो बिना पुजारी और दहेज के विवाह आयोजित करता था।

सावित्रीबाई एक कुशल कवयित्री भी थीं। उनके काव्य संग्रहों में प्रकृति, शिक्षा और जाति प्रथा के विरुद्ध विचारों का प्रतिबिंब दिखाई देता है। उनके प्रसिद्ध कथनों में “शिक्षा स्वर्ग का द्वार खोलती है,” और “कलम तलवार से भी अधिक शक्तिशाली है” जैसे विचार शामिल हैं।

प्लेग महामारी के दौरान मरीजों की सेवा करते हुए 1897 में सावित्रीबाई का निधन हो गया। उनका जीवन महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय के लिए समर्पित था, और उनकी विरासत आज भी हमें प्रेरित करती है।

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