Tue Nov 12 13:00:00 UTC 2024: ## 50 से ज़्यादा मुस्लिम देशों का आपातकालीन सम्मेलन: ट्रम्प पर दबाव और इजरायल की निंदा

सऊदी अरब की राजधानी रियाद में 50 से ज़्यादा मुस्लिम देशों का आपातकालीन सम्मेलन आयोजित किया गया. इस सम्मेलन में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से लेकर तुर्की के राष्ट्रपति रेसप तैय्यप एर्दोगन तक कई बड़े नेता शामिल थे. सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य ईरान, लेबनान, गाजा और फिलिस्तीन के मसलों पर चर्चा करना और आगे की रणनीति तय करना था.

सम्मेलन अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रम्प की जीत के बाद बुलाया गया था. ट्रम्प को इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का करीबी माना जाता है, और कई लोगों का मानना है कि इस सम्मेलन का मकसद ट्रम्प पर इज़रायल की कार्रवाई रोकने के लिए दबाव बनाना था.

सम्मेलन में सभी मुस्लिम देशों ने एक स्वर में लेबनान, गाजा और फिलिस्तीन में इज़रायल की कार्रवाई की निंदा की. सऊदी क्राउन प्रिंस ने कहा कि सऊदी अरब फिलिस्तीनियों के जनसंहार की निंदा करता है और इसे तुरंत रोकना चाहिए. उन्होंने कहा कि फिलीस्तीन एक स्वतंत्र देश है और इसे स्वतंत्रता मिलनी चाहिए. उन्होंने इज़रायल से वेस्ट बैंक और गाजा से अपने सैनिकों को हटाने की माँग भी की.

सम्मेलन में ईरान के संप्रभुता का सम्मान करने की भी मांग की गई और इज़रायल पर किसी भी तरह के हमले से बचाने के लिए दबाव बनाया गया.

सम्मेलन में 33 सूत्रीय मसौदा भी पेश किया गया जिसमें फिलीस्तीन के प्रति समर्थन व्यक्त किया गया, लेबनान, ईरान, इराक और सीरिया की संप्रभुता का उल्लंघन की निंदा की गई, और इज़रायल से गाजा संघर्ष खत्म करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की गई.

यह सम्मेलन इज़रायल-फिलिस्तीन संघर्ष के मद्देनजर मुस्लिम देशों की एकता और ट्रम्प सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश का प्रतीक माना जा रहा है.

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