Mon Nov 11 22:44:55 UTC 2024: ## देवोत्थान एकादशी: भगवान विष्णु का जागरण, व्रत और पूजा विधि

**नई दिल्ली:** 12 नवंबर को कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि मनाई जाएगी, जिसे प्रबोधिनी व देवउठनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा (शयन) से जागते हैं।

वैदिक पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 11 नवंबर को शाम 6 बजकर 47 मिनट पर शुरू होगी और 12 नवंबर को शाम 4 बजकर 04 मिनट तक रहेगी। पदम पुराण में वर्णित है कि इस व्रत का फल एक हजार अश्वमेघ यज्ञ और सौ राजसूय यज्ञ के बराबर होता है।

**पूजा विधि:**

* इस दिन प्रातःकाल स्नान करके भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
* पंचामृत से अभिषेक करें।
* पूजा में तुलसी के पत्तों का विशेष महत्व होता है।
* भगवान विष्णु को पीले फूल, पीतांबर वस्त्र, फल और मिठाई अर्पित करें।
* रात को जागरण करें, व्रत कथा सुनें, तुलसी दल सहित भोग लगाएं और आरती गाएं।
* अंत में क्षमा मांगे।

**देव उत्थान विधि:**

* गन्ने का मंडप बनाकर बीच में चौक बनाएं।
* इस चौक पर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र रखें।
* चौक के साथ श्री हरिचरण बनाएं।
* भगवान को गन्ना, सिंघाड़ा, फल और मिठाई समर्पित करें।
* घी का दीपक जलाएं जो रात-भर जलता है।
* भोर में भगवान के चरणों की विधिवत पूजा करें।
* फिर उनके चरणों को स्पर्श करके उन्हें जगाएं।
* नारद पुराण के अनुसार इस दिन उपवास करके रात में सोए हुए भगवान को गीत आदि मांगलिक उत्सवों द्वारा जगाएं।

**भोग:**

* फल- केला, आंवला, अनार, सिंहाड़ा, सेब तथा पीले मिष्ठान के साथ खीर का भोग प्रसाद में लगाना चाहिए।

**उपाय:**

* देवउठनी एकादशी के दिन श्री विष्णु चालीसा का पाठ करने, तुलसी व केले के पेड़ की पूजा करने से जातक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती हैं।

**Disclaimer:** यह जानकारी केवल सामान्य ज्ञान के लिए है। अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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