Tue Nov 12 01:46:58 UTC 2024: ## देवोत्थानी एकादशी: शादी-विवाह का शुभ आरंभ

आज, 12 नवंबर को, देवोत्थानी एकादशी मनाई जा रही है। यह दिन भगवान विष्णु के चार महीने की नींद से जागने का प्रतीक है और इसी दिन से शादी, विवाह जैसे मांगलिक कार्यक्रमों का शुभ आरंभ होता है।

ज्योतिषाचार्य मनोज कुमार द्विवेदी के अनुसार, अषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहते हैं, जब भगवान विष्णु सो जाते हैं और मांगलिक कार्यक्रमों पर रोक लग जाती है।

देवोत्थानी एकादशी के दिन बिठूर, परमट घाट, सरसैया घाट, गोला घाट, मैस्कर घाट समेत गंगा किनारे घाटों पर भक्त स्नान करते हैं।

यह त्यौहार दीपावली के 11 दिन बाद मनाया जाता है। 11 नवंबर की शाम 6:46 मिनट से एकादशी की तिथि शुरू हुई, जो 12 नवंबर की शाम 4:04 मिनट तक जारी रहेगी। उदया तिथि के कारण 12 नवंबर को देवोत्थानी एकादशी मनाई जा रही है।

12 नवंबर को रवि योग सुबह 7:52 तक जारी रहेगा, इसके बाद सर्वाथ सिद्धि योग की शुरूआत होगी, जो शादी विवाह की मनोकामना पूर्ण होने के लिए विशेष लाभकारी माना जाता है।

इस दिन भगवान को प्रसन्न करने के लिए ऋतु फल गन्ना, सिंघाड़ा व सब्जियों का भोग लगाया जाता है।

देवोत्थानी एकादशी में माता तुलसी और शालिग्राम का विवाह होता है, जो कार्तिक पूर्णिमा पर माता तुलसी की विदाई होती है, जिसे देव दीपावली के रूप में मनाया जाता है। तुलसी विवाह के साथ ही सारे मांगलिक कार्यक्रम शुरू हो जाएंगे, जो 15 दिसंबर तक जारी रहेंगे।

15 दिसंबर को सूर्य धनुराशि में प्रवेश करेगा, जिसके साथ खरमास प्रारंभ हो जाएगा, इस दौरान मांगलिक कार्यक्रमों पर रोक लग जाएगी। 15 जनवरी को सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही एक बार फिर शादी विवाह का दौर शुरू होगा, जो 2 मार्च तक जारी रहेगा।

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