Tue Nov 12 00:30:00 UTC 2024: ## देवउठनी एकादशी पर तुलसी विवाह का विशेष महत्व
आज देवउठनी एकादशी है, एक महत्वपूर्ण त्यौहार जिस पर शाम को देवताओं को उठाया जाता है। इस दिन तुलसी विवाह भी किया जाता है, जो कार्तिक मास की एकादशी से पूर्णिमा तक मनाया जाता है।
तुलसी विवाह में तुलसी के पौधे को श्री हरि विष्णु से जोड़ा जाता है, जिसके लिए शालिग्राम पत्थर का उपयोग किया जाता है। इस विवाह को पूरे भारत और विश्व भर में श्रद्धा भाव से मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि तुलसी विवाह करने से पूर्व जन्म के पाप समाप्त हो जाते हैं और जिन दंपतियों को संतान नहीं है, विशेषकर कन्या संतान, उन्हें कन्यादान का पुण्य मिलता है।
तुलसी विवाह के दौरान कुछ बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है:
* एकादशी तिथि पर चावल नहीं खाया जाता है, और पूजा में भी कच्चे चावल का प्रयोग वर्जित है। अक्षत के स्थान पर तिल का उपयोग किया जा सकता है।
* तुलसी पर जल अर्पित नहीं किया जाता है और न ही इस दिन इसके पत्ते तोड़ें। पंचामृत में भी तुलसी के पत्ते नहीं डाले जाते।
* तुलसी और शालिग्राम के लिए नए वस्त्र और जयमाला लाएँ, और विधिवत फेरे भी लें।
**Disclaimer:** यह जानकारी सामान्य ज्ञान के लिए है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान को करने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।