Fri Nov 08 07:05:16 UTC 2024: ## सुप्रीम कोर्ट ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के अल्पसंख्यक दर्जे को बरकरार रखा

**नई दिल्ली:** सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक फैसले में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के अल्पसंख्यक दर्जे को बरकरार रखा है। हालांकि, कोर्ट ने 4-3 के बहुमत से यह फैसला सुनाया है, जिसके बाद AMU के अल्पसंख्यक दर्जे को लेकर एक नई तीन जजों की बेंच आगे फैसला लेगी।

यह फैसला सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ समेत 4 जजों की बेंच द्वारा सुनाया गया है। बेंच में शामिल चार जजों ने AMU के अल्पसंख्यक दर्जे को बरकरार रखने के पक्ष में फैसला दिया। वहीं, जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस दीपाकंर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने AMU के अल्पसंख्यक दर्जे पर असहमति व्यक्त की।

इस मामले में पहले 1967 में 5 जजों की संविधान पीठ ने एएमयू को अल्पसंख्यक संस्थान नहीं माना था। कोर्ट ने तर्क दिया था कि एएमयू की स्थापना मुस्लिम समुदाय द्वारा नहीं की गई थी और न ही यह उनके द्वारा प्रशासित था। 1981 में एएमयू अधिनियम में संशोधन के बाद विश्वविद्यालय ने खुद को “भारत के मुसलमानों द्वारा स्थापित” बताते हुए अल्पसंख्यक दर्जे का दावा किया था।

शुक्रवार के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने 1967 के अजीज बाशा फैसले को रद्द कर दिया। इस फैसले से AMU के अल्पसंख्यक दर्जे पर एक नई बहस छिड़ गई है, जिसका निपटारा अब तीन जजों की बेंच को करना होगा।

इस बीच, उत्तर प्रदेश सरकार ने डीजीपी चयन के लिए एक नई समिति गठित की है जिसमें हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश अध्यक्ष होंगे। इस समिति को डीजीपी के कार्यकाल, सेवा रिकॉर्ड और अनुभव के आधार पर चयन करना होगा। यह कदम केंद्र सरकार की भूमिका को डीजीपी चयन से कम करने का प्रयास है।

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