Thu Oct 31 02:30:00 UTC 2024: ## इंदिरा गांधी: एक कूटनीतिक कलाकार और सख्त नेता

**नई दिल्ली:** भारत की प्रधानमंत्री, इंदिरा गांधी, एक सक्षम नेता के रूप में जानी जाती थीं जिनकी अंतरराष्ट्रीय मंच पर गहरी छाप थी। विभिन्न नेताओं के साथ उनकी मुलाक़ातों के कई किस्से, जिनमें पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल ज़िया उल हक़ से लेकर श्रीलंका के राष्ट्रपति जूनियस जयवर्द्धने तक, उनकी कूटनीतिक कला का प्रमाण देते हैं।

**ज़िया उल हक़ से कश्मीर मुद्दे पर तनाव:** जिम्बाब्वे की स्वतंत्रता के समारोह में ज़िया उल हक़ ने इंदिरा गांधी से मुलाक़ात का अनुरोध किया। मुलाक़ात के दौरान, ज़िया ने इंदिरा गांधी को कश्मीर का नक्शा दिखाया जिसमें पूरे कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा दिखाया गया था। इंदिरा गांधी ने तुरंत यह किताब ज़िया के विदेश मंत्रालय को वापस भेज दी।

**जयवर्द्धने के साथ तनावपूर्ण संबंध:** श्रीलंका के राष्ट्रपति जूनियस जयवर्द्धने से इंदिरा गांधी के संबंध तनावपूर्ण रहे। इंदिरा को जयवर्द्धने का तमिल लोगों के प्रति भेदभाव और श्रीलंकाई समस्या को भारत के विरुद्ध एक विदेशी मुद्दा बनाने की कोशिशें नागवार थीं।

**मदर टेरेसा सम्मान समारोह का विवाद:** 1983 में राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों के शिखर सम्मेलन में, महारानी द्वारा मदर टेरेसा को सम्मानित करने का प्रस्ताव इंदिरा गांधी को पसंद नहीं आया। उन्होंने ब्रिटेन की प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर से राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले इस समारोह को ब्रिटिश उच्चायोग या उच्चायुक्त के निवास स्थान पर आयोजित करने का आग्रह किया। हालांकि, थैचर ने बताया कि निमंत्रण पत्र पहले ही भेजे जा चुके थे। इंदिरा गांधी ने सख्ती दिखाते हुए यह भी संदेश दिया कि यदि समारोह राष्ट्रपति भवन में ही आयोजित किया जाता है, तो भारतीय संसद में इस मामले को उठाया जाएगा। नतीजतन, समारोह को रद्द कर दिया गया और मदर टेरेसा को मुगल गार्डन में चाय पर आमंत्रित कर सम्मान दिया गया।

**अमेरिका से संबंध:** इंदिरा गांधी का अमेरिका के राष्ट्रपति निक्सन और रोनाल्ड रीगन के साथ संबंध भी मिश्रित रहे। नटवर सिंह के अनुसार, निक्सन ने इंदिरा गांधी को व्हाइट हाउस में भोज पर आमंत्रित किया था, लेकिन इंदिरा गांधी ने केवल अखबारों में छपे निमंत्रण को स्वीकार नहीं किया और भोज में शामिल नहीं हुईं।

**सोवियत संघ के साथ संबंध:** इंदिरा गांधी अपने पिता, जवाहरलाल नेहरू की तरह सोवियत संघ के साथ समान वैचारिक धरातल पर नहीं थीं। चिन्मय गरेखान बताते हैं कि इंदिरा गांधी ने अक्सर सोवियत राजदूत को डांटा है, और उन्हें सोवियत संघ से ग़लतफ़हमी थी कि वे उनका हर हालत में साथ देंगे।

**विदेशी नेताओं के साथ बातचीत में निपुणता:** इंदिरा गांधी विदेशी नेताओं के साथ बातचीत में निपुण थीं। पीसी एलेक्ज़ेंडर बताते हैं कि इंदिरा गांधी का हर शब्द सधा हुआ होता था और वे अपनी कूटनीतिक कला के ज़रिए कठिन परिस्थितियों में भी सफलता प्राप्त करती थीं।

**एक कठोर लेकिन मानवतावादी नेता:** इंदिरा गांधी एक कठोर नेता थीं, लेकिन उनका मानवतावादी पक्ष भी था। वे कला और संस्कृति के प्रति भी बहुत रुचि रखती थीं।

**निष्कर्ष:** इंदिरा गांधी ने अपने कार्यकाल में विभिन्न चुनौतियों का सामना किया, और अपनी कूटनीतिक कला, दृढ़ता, और नेतृत्व गुणों के साथ भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक मज़बूत स्थान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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