Tue Oct 29 20:40:14 UTC 2024: ## काली पूजा: शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि
**नई दिल्ली:** धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां काली की पूजा करने से साधक को सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति मिलती है। इस वर्ष कार्तिक माह की अमावस्या तिथि 31 अक्टूबर को दोपहर 3 बजकर 52 मिनट से शुरू होकर 1 नवंबर को संध्याकाल 6 बजकर 16 मिनट पर समाप्त होगी। मां काली की पूजा निशिता काल में होती है, जिसके लिए 31 अक्टूबर को ही पूजा का आयोजन किया जाएगा।
वैदिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक अमावस्या पर प्रीति योग सुबह 9 बजकर 51 मिनट से और शिववास योग दोपहर 3 बजकर 53 मिनट से शुरू हो रहा है। इन दोनों योगों के संयोग में शिव-शक्ति और मां काली की पूजा करने से साधक के सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है।
काली चौदस के दिन मां काली की पूजा करने से पहले अभ्यंग स्नान करना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसा करने से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। इस दिन मां काली की पूजा करने से पहले स्नान कर इत्र लगाकर पूजा में बैठें। एक चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाकर मां काली की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद दीपक जलाएं और मां काली को फल, पुष्प, कुमकुम, हल्दी, कपूर, नारियल और नैवेद्य अर्पित करें। पूजा का समापन काली चालीसा पाठ और मंत्र जाप से करें।