Mon Oct 14 05:42:31 UTC 2024: ## आरटीआई अधिनियम की 18वीं वर्षगांठ: सूचना आयोगों में चार लाख से अधिक शिकायतें लंबित
**नई दिल्ली:** 12 अक्टूबर, 2024 को ‘सूचना का अधिकार (आरटीआई)’ अधिनियम लागू होने की 18वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है, लेकिन इस महत्वपूर्ण कानून की प्रभावशीलता को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं।
सतर्क नागरिक संगठन की रिपोर्ट “भारत में सूचना आयोगों के प्रदर्शन पर रिपोर्ट कार्ड, 2023-24” के अनुसार देश भर के सूचना आयोगों में चार लाख से अधिक शिकायतें और अपीलें लंबित हैं। कई आयोग निष्क्रिय हो चुके हैं और सूचना आयुक्तों के पद खाली पड़े हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि महाराष्ट्र में सबसे अधिक 1,08,641 अपीलें/शिकायतें लंबित हैं, इसके बाद कर्नाटक (50,000), तमिलनाडु (41,241) और छत्तीसगढ़ (25,317) का नंबर आता है।
अंजलि भारद्वाज, सतर्क नागरिक संगठन की संस्थापक और कार्यकर्ता, ने कहा कि सूचना आयुक्तों की नियुक्तियां समय पर न होने के कारण मामलों का बोझ लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, “अगर छत्तीसगढ़ और बिहार में एक नया आरटीआई दायर किया जाए तो उसकी सुनवाई का नंबर आने में चार से पांच साल तक का समय लग जाएगा, जिससे सूचना का महत्व समाप्त हो जाता है।”
रिपोर्ट यह भी बताती है कि 7 सूचना आयोग निष्क्रिय रहे क्योंकि नए आयुक्तों की नियुक्ति नहीं हुई। इसके अलावा 5 आयोगों में मुख्य सूचना आयुक्त के पद रिक्त हैं।
कई आयोग बिना कोई आदेश पारित किए आवेदन वापस कर दे रहे हैं। अंजलि ने आरोप लगाया कि सरकारें जानबूझकर सूचना देने से बच रही हैं, जिसके कारण आरटीआई की प्रासंगिकता घट रही है।
रिपोर्ट यह भी बताती है कि सूचना आयोगों द्वारा 95% मामलों में जुर्माना नहीं लगाया गया, जबकि पीआईओ पर कानून का उल्लंघन करने पर 25,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि आरटीआई अधिनियम के कार्यान्वयन पर वार्षिक रिपोर्ट तैयार करने में भी कई आयोग लापरवाही बरत रहे हैं।
सतर्क नागरिक संगठन ने इस मामले पर सरकार से तत्काल कार्रवाई करने और आरटीआई को मजबूत बनाने की अपील की है।