Fri Oct 11 21:46:07 UTC 2024: ## राजपरिवारों में विजयादशमी का विशेष व्यंजन
**अयोध्या से रीवा तक, राजघराने मनाते हैं दशहरा खास अंदाज में, खाने में भी है खासियत**
भारत में विजयादशमी का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाया जाता है। राजपरिवारों में भी विजयादशमी का खास महत्व है। इस दिन वे भगवान राम की शौर्य को नमन करते हैं और शस्त्र पूजन करते हैं। लेकिन राजपरिवारों में दशहरा सिर्फ धार्मिक उत्सव ही नहीं, बल्कि स्वादिष्ट व्यंजनों का पर्व भी होता है।
अयोध्या राजपरिवार की मंजरी मिश्रा बताती हैं, “विजयदशमी को देवी पूजन, चंद्रपूजन, शमी पूजन और कुल गुरु की पूजा होती है। इसके बाद बिना लहसुन-प्याज के तैयार ब्राह्मण भोज होता है। इस थाली में दाल का पराठा, सूरन की सब्जी, दही बड़ा आदि शामिल होते हैं।”
बिहार में हथुआ राजपरिवार की कुलमाता कुमार रानी सुमिता साही बताती हैं कि उनके परिवार में नौ दिन व्रत के दौरान सात्विक भोजन बनता है। दशमी को शस्त्र पूजन के बाद नए आलू और पत्तागोभी के साथ पत्तागोभी पुलाव बनता है, जो नए मौसम का स्वागत करता है। बैंगन का भर्ता, दही बड़ा और लौकी का रायता भी थाली का हिस्सा हैं। चने की दाल से बनी दालपूरी भी इस थाली का अहम हिस्सा है।
मध्य प्रदेश के रीवा रियासत की बघेली थाली भी दशहरा पर खास होती है। रीवा राजपरिवार के महाराजा पुष्पराज सिंह बताते हैं, “विंध्य की मिट्टी में जो कुछ भी उगाया जाता है, बघेलों का राजपरिवार उसका सेवन करता है। आठ या नौ दिनों के उपवास के बाद शाकाहारी और मांसाहारी बघेली व्यंजन तैयार किए जाते हैं। इसमें इंद्रहार, रिकमच, दाल पूरियां, मींजा कढ़ी, कोदई भाजी, लउबरा, कटहल मसाला, गुलाब चावल, कटहल बिरयानी, महेरी, कोदो चावल की खीर, मटन कबाब, मटन/चिकन बघेली, सूफियाना चावल, कोदो की खीर, चने का हलवा, खुरचन, लौकी का हलवा, बेसन के लड्डू, बेल का शरबत, आम का रस, महुआ का शर्बत, बादाम ठंडई शामिल हैं।”
मेवाड़ राजघराने के राजकुमार लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ बताते हैं, “मेवाड़ के राजमहलों में सदियों से पारंपरिक भोजन बनता आ रहा है। हमारी शाही थाली दाल-बाटी, चूरमा, लाल मांस, सफेद मुर्ग, मोहन मांस, दाल ढोकली, पापड़, केर सांगरी अचार और रोटी से सजी होती है। इसमें श्रीअन्न से तैयार भोजन भी मिलता है, जिसमें बाजरे की राब का भी अहम स्थान है। वहीं मीठे में केसरी भात, गुलाबी खीर, मखनी रसगुल्ला शामिल होते हैं।”
राजपरिवारों में विजयादशमी के दिन बनाए जाने वाले व्यंजनों में मौसमी सब्जियां और स्थानीय सामग्री का भरपूर इस्तेमाल होता है। हर व्यंजन को सटीकता के साथ तैयार किया जाता है और राजपरिवार के सदस्य खुद इसकी निगरानी करते हैं। ये व्यंजन न सिर्फ स्वादिष्ट होते हैं, बल्कि ये राजपरिवारों की खानपान संस्कृति और पारंपरिक व्यंजनों को भी दर्शाते हैं।