Sat Oct 12 01:41:15 UTC 2024: ## रोपा गांव में दशहरे पर रावण का वध, नहीं होता दहन

**राजस्थान के शाहपुरा जिले के रोपा गांव में दशहरे का त्योहार एक अनोखे तरीके से मनाया जाता है. यहां रावण का दहन नहीं होता, बल्कि उसका वध किया जाता है.**

गांव में पिछले 85 सालों से 10 फीट ऊंची रावण की एक स्थायी प्रतिमा है, जो सीमेंट से बनी हुई है. दशहरे पर इस प्रतिमा को रंगों से रंग कर वध के लिए तैयार किया जाता है. गांव वालों का मानना है कि लक्ष्मण ने जिससे ज्ञान प्राप्त किया हो उसको इंसान कैसे जला सकता है.

गांव के सरपंच सत्यनारायण धाकड़ ने बताया कि रावण वध की परंपरा किसने शुरू की, इस बात की कोई पुख्ता जानकारी नहीं है. लेकिन ऐसा माना जाता है कि पूर्वजों के समय से ही यहां दशहरे पर रावण का वध किया जाता रहा है.

रोपा में दशहरे से एक दिन पहले लंका दहन का आयोजन किया जाता है. इस दौरान गांव के भगवान चारभुजा नाथ मंदिर से ठाकुर जी की शोभायात्रा निकाली जाती है. शोभायात्रा के बाद हनुमान बने बाल कलाकार रावण चौक पहुंचते हैं और लंका दहन करते हैं. गांव में जो सबसे ज्यादा बोली लगाता है वह राम बनता है और इससे थोड़ा कम बोली लगाने वाला लक्ष्मण बनता है.

रावण वध के लिए गांव के चौराहे पर बनी प्रतिमा के पेट पर मटकी बांधी जाती है, जिसे राम बना कलाकार भगवान चारभुजा नाथ मंदिर में रखे हुए भाले से फोड़ता है.

**रोपा गांव में यह अनोखी परंपरा दशहरे के त्योहार को एक अलग रंग देती है, जो इसे आसपास के गांवों में भी लोकप्रिय बनाती है.**

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