Fri Oct 11 16:49:28 UTC 2024: ## आलिया भट्ट की “जिगरा” फिल्म: एक्शन से भरपूर लेकिन कहानी में कमी
मुंबई: आलिया भट्ट की बहुप्रतीक्षित फिल्म “जिगरा” हाल ही में सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। फिल्म में आलिया एक एक्शन हीरोइन के रूप में नजर आ रही हैं, अपने भाई (वेदांग रैना) को जेल से छुड़ाने के लिए। हालांकि, फिल्म समीक्षकों ने फिल्म की कहानी में कमी और अधूरे पात्रों को लेकर सवाल उठाए हैं।
निर्देशक वासन बाला द्वारा निर्देशित “जिगरा” में एक नयापन है। आलिया, अपने भाई की सुरक्षा के लिए एक ‘एंग्री यंग वूमन’ का किरदार निभाती हैं, जो कुछ हद तक अमिताभ बच्चन की 70-80 के दशक की फिल्मों के नायकों की याद दिलाता है।
फिल्म की कहानी में एक अपराधी अंकुर (वेदांग) दक्षिण पूर्व एशिया में ड्रग्स तस्करी के आरोप में फंस जाता है और उसे मौत की सजा मिलने वाली है। उसकी बहन सत्या (आलिया) अपने भाई को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करती है।
हालांकि, “जिगरा” की तुलना श्रीदेवी अभिनीत फिल्म “गुमराह” से की जा रही है, जहां संजय दत्त एक महिला को जेल से छुड़ाने के लिए सब कुछ दांव पर लगा देते हैं। समीक्षकों का मानना है कि “जिगरा” में भाई-बहन के संबंधों को पर्याप्त रूप से उभारा नहीं जा सका है।
फिल्म में कई अन्य कमियां भी दिखती हैं। अंकुर की जेल में फंसने की कहानी, मुथु (राहुल रवींद्रन) की गलती, और शेखर भाटिया (मनोज पाहवा) के बेटे को जेल में फंसने के कारणों को स्पष्ट नहीं किया गया है। फिल्म की जेल में सुरक्षा के बारे में भी कई सवाल उठते हैं।
“जिगरा” में वासन बाला का अमिताभ बच्चन के प्रति प्रेम भी झलकता है, जब शेखर अपने मोबाइल पर अमिताभ की फिल्मों के गाने सुनता है।
फिल्म की लंबी अवधि और दोहराव वाले दृश्यों ने भी समीक्षकों को निराश किया। “जिगरा” में आलिया की एक्शन दृश्य प्रशंसनीय हैं, और वेदांग, विवेक गोंबर, मनोज पाहवा, और राहुल रवींद्र का प्रदर्शन उल्लेखनीय है। हालांकि, फिल्म की कहानी में सुधार और पात्रों को बेहतर तरीके से गढ़ने की आवश्यकता थी।
कुल मिलाकर, “जिगरा” एक एक्शन-पैक फिल्म है, जो आलिया भट्ट के दमदार अभिनय से सजी हुई है। लेकिन कहानी में कमी और कई अधूरे तत्व इस फिल्म को एक बेहतर अनुभव बनाने से रोकते हैं।