Sun Oct 06 07:11:43 UTC 2024: ## माँ कुष्मांडा की पूजा: नवरात्रि के चौथे दिन

**नई दिल्ली:** देशभर में शारदीय नवरात्रि का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस पर्व के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा-अर्चना करने का विधान है। माना जाता है कि मां कुष्मांडा, ब्रह्मांड की रचनाकार हैं और सूर्यमंडल में निवास करती हैं। उनकी सच्चे मन से उपासना करने से सभी तरह के सुखों की प्राप्ति होती है।

**माँ कुष्मांडा की पूजा का शुभ मुहूर्त:**

पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की चर्तुथी तिथि 06 अक्टूबर को सुबह 07 बजकर 49 मिनट से शुरू होकर 07 अक्टूबर को 09 बजकर 47 मिनट पर समाप्त होगी।

**पूजा विधि:**

* सुबह जल्दी उठें और दिन की शुरुआत मां कुष्मांडा के ध्यान से करें।
* स्नान करके साफ कपड़े पहनें।
* मां कुष्मांडा को फल, फूल, धूप, दीप, हल्दी, चंदन, कुमकुम आदि अर्पित करें।
* दीपक जलाकर आरती करें और मंत्रों का जाप करें।
* मां कुष्मांडा की आरती करें और व्रत कथा का पाठ करें।
* भोग में मालपुआ शामिल करें।
* मां से जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति के लिए कामना करें।

**माँ कुष्मांडा को प्रिय चीजें:**

* माँ कुष्मांडा को मालपुआ प्रिय है, इसका भोग लगाने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
* पीले रंग के फूल और चमेली के फूल मां को अर्पित करने से आरोग्य जीवन की प्राप्ति होती है।

**माँ कुष्मांडा के लिए मंत्र:**

* या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कूष्मांडा रूपेण संस्थिता।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
* ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै’

**नोट:** इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य सूचना के लिए है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान के लिए किसी योग्य पंडित या ज्योतिषी की सलाह लें।

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