Sun Oct 06 03:51:51 UTC 2024: ## मां चंद्रघंटा की आराधना : शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन

**नई दिल्ली:** शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन, 05 अक्टूबर 2024 को, देवी दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप की आराधना की जाती है। माना जाता है कि इस दिन मां चंद्रघंटा की पूजा करने से जीवन के समस्त दुखों से मुक्ति मिलती है और हर मनोकामना पूरी होती है।

मां चंद्रघंटा का स्वरूप स्वर्ण के समान चमकीला है। उनके तीन नेत्र और दस हाथ हैं। शेर पर सवार मां चंद्रघंटा अपने हाथों में गदा, बाण, धनुष, त्रिशूल, खड्ग, कमल, चक्र आदि लिए रहती हैं। मां के सिर पर रत्नों से जड़ा एक मुकुट भी विराजमान है।

मां चंद्रघंटा का बीज मंत्र “ऐं श्रीं शक्तयै नमः” है।

**मां चंद्रघंटा को प्रसन्न करने के लिए:**

* सुबह सूर्योदय से पहले उठें, स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
* घर के मंदिर को साफ करें, पुराने फूलों को हटा दें और मां चंद्रघंटा की प्रतिमा के समक्ष दीपक प्रज्ज्वलित करें।
* माता रानी को फल, फूल, धूप, दीप, अक्षत और कुमकुम अर्पित करें।
* देवी के बीज मंत्रों का जाप करें और दुर्गा सप्तशी तथा दुर्गा चालीसा का पाठ करें।
* मां चंद्रघंटा की आरती उतारें और उन्हें दूध, खीर या सफेद मिठाई का भोग लगाएं। शहद भी अर्पित किया जा सकता है।
* मां चंद्रघंटा को भूरा रंग बहुत प्रिय है। इस दिन देवी को प्रसन्न करने के लिए भूरा या गोल्डन रंग का वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है।

**मां चंद्रघंटा की आराधना का महत्व:**

मां चंद्रघंटा मां पार्वती का विवाहित स्वरूप हैं। शिव जी से विवाह के बाद मां अपने माथे पर अर्धचंद्र धारण करती हैं। इसलिए उन्हें चंद्रघंटा के नाम से जाना जाता है। मां चंद्रघंटा संसार में न्याय और अनुशासन स्थापित करती हैं। माना जाता है कि मां चंद्रघंटा की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से मां भक्तों से प्रसन्न होकर सुख-शांति और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।

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