Sat Oct 05 09:49:11 UTC 2024: ## मां ब्रह्मचारिणी की पूजा: नवरात्रि के दूसरे दिन की कथा और महत्व

**नई दिल्ली:** शारदीय नवरात्र का पर्व, जो इस साल 3 अक्टूबर से शुरू हुआ, अपने दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा के लिए समर्पित है। मां ब्रह्मचारिणी, देवी दुर्गा का एक शांत स्वरूप हैं, जो जप माला और कमण्डल धारण करती हैं। ऐसा कहा जाता है कि जो भक्त अपने जीवन में दिव्य ज्ञान की कामना करते हैं उन्हें मां की पूजा जरूर करनी चाहिए। ऐसा करने से उन्हें सुख-शांति की प्राप्ति होती है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी हिमालय और देवी मैना की पुत्री हैं। उन्होंने शिवजी को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए नारद मुनि के कहने पर कठोर तपस्या की थी। इस कठिन तपस्या के कारण इन्हें तपश्चारिणी अर्थात्‌ ब्रह्मचारिणी नाम से जाना जाता है।

कहा जाता है कि तपस्या के दौरान उन्होंने तीन हजार वर्षों तक टूटे हुए बिल्व पत्र खाए थे और कई हजार वर्षों तक निर्जल व निराहार तपस्या की थी। इस घोर तपस्या के कारण देवी का शरीर क्षीर्ण हो गया था, जिससे देवता, ऋषि, सिद्धगण, मुनि सभी ने उनकी तपस्या को अभूतपूर्व पुण्य कृत्य बताकर सराहना की।

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से सर्वसिद्धि की प्राप्ति होती है।

**नोट:** यह लेख धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक कथाओं पर आधारित है।

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