Wed Sep 25 05:54:38 UTC 2024: ## लेबनान: मिडिल ईस्ट का पेरिस से दुःस्वप्न तक
एक समय लेबनान, खासकर इसकी राजधानी बेरूत, दुनिया भर के अमीर पर्यटकों के लिए एक आकर्षण का केंद्र था. इसे “मिडिल ईस्ट का स्विट्जरलैंड” कहा जाता था, जहां शानदार समुद्र तट, जीवंत नाइटलाइफ़ और एक आज़ादी से घूमने वाली संस्कृति थी. लेकिन राजनीतिक और आर्थिक संकटों ने इसे आज के दौर में दुर्दशा की ओर धकेल दिया है.
1930 के दशक में बेरूत में पहला बीच क्लब, सेंट जॉर्ज क्लब, खोला गया था. 1950 के दशक में पैसे आने का सिलसिला बढ़ा और “ला डोल्से वीटा” का मिडिल ईस्ट में आगमन हुआ. पांच सितारा होटल, नाइटक्लब और फाइन-डाइनिंग रेस्टोरेंट खुलने लगे, और ब्रिजिट बार्डोट और मार्लन ब्रैंडो जैसे हॉलीवुड सितारे वहां समय बिताने आए. लेकिन 1975 से 1990 तक चला गृहयुद्ध, अस्थिर सरकारें और भ्रष्टाचार ने इस समृद्ध संस्कृति को ध्वस्त कर दिया.
गृहयुद्ध ने लेबनान के लिए एक नया अध्याय खोला, जिसने देश को तबाह कर दिया और आर्थिक तबाही ला दी. भारी कर्ज और बैंकों का दिवालिया होना आम हो गया. 2011 में हिज्बुल्लाह के बढ़ते प्रभाव ने सुन्नी देशों को लेबनान से दूरी बनाने के लिए प्रेरित किया, जिससे आर्थिक स्थिति और खराब हो गई.
अमीरों ने आर्थिक स्थिति को और खराब करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, क्योंकि उन्होंने भारी उधारियों के बावजूद कर्ज लेना जारी रखा. लेबनान की वित्तीय प्रणाली को एक पोंजी स्कीम बताया गया, जिसमें नए धन का उपयोग पुराने कर्ज को चुकाने के लिए किया जाता था. जब नया पैसा आना बंद हुआ, तो यह सिस्टम ढह गया.
आज बेरूत में गरीबी फैली हुई है. बच्चे सड़कों पर भीख मांगते हैं और परिवार बुनियादी जरूरतें पूरी करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. भले ही देश संकट से जूझ रहा है, लेकिन बेरूत की नाइटलाइफ़ अभी भी मिडिल ईस्ट में सबसे अच्छी मानी जाती है. क्लब और बार पूरी तरह से काम कर रहे हैं और जीवन का कुछ हद तक सामान्य रूप बना हुआ है.
लेबनान, जिसे कभी “मिडिल ईस्ट का पेरिस” कहा जाता था, आज एक आधुनिक दुःस्वप्न में बदल गया है. सेंट जॉर्ज होटल, जो कभी हॉलीवुड सितारों और शाही मेहमानों की मेजबानी करता था, अब बमबारी से क्षतिग्रस्त है. लेबनान, जो कभी कला, संस्कृति और भव्य जीवनशैली का प्रतीक था, अब हिज्बुल्लाह के गढ़ के रूप में परिभाषित हो चुका है.