Tue Sep 17 09:01:48 UTC 2024: ## पितृ पक्ष: पूर्वजों को याद करने का समय, जानें महत्वपूर्ण तिथियां और नियम

**मैनपुरी:** इस साल पितृ पक्ष मंगलवार, 17 सितंबर से शुरू हो रहा है और दो अक्टूबर को समाप्त होगा। 16 दिनों तक चलने वाले इस पवित्र काल में पूर्वजों को श्रद्धांजलि देने और उनके लिए तर्पण करने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दौरान पितरों का तर्पण करने से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है।

सोतियाना स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर के महंत पं. शील नामाचार्य के अनुसार, पितृ पक्ष पितरों को याद करने का एक महत्वपूर्ण काल होता है। इस दौरान तर्पण और विशेष तिथि को श्राद्ध करना आवश्यक है। ऐसा करने से परिवार और वंश का विकास होता है और परिवार के सदस्यों पर लगे रोग और कष्ट दूर होते हैं।

इस बार पितृ पक्ष पूर्णिमा तिथि से शुरू हो रहा है। उदया तिथि के अनुसार, पूर्णिमा का श्राद्ध बुधवार सुबह आठ बजे तक किया जा सकेगा, इसके बाद प्रतिपदा लगेगी। हालांकि, श्राद्ध का समय सामान्यतया दोपहर माना जाता है।

पंडित आशीष मिश्र ने पितृ दोष दूर करने के लिए कुछ उपाय बताए हैं। उन्होंने घर में गीता पाठ कराने, प्रत्येक अमावस्या को ब्राह्मणों को भोजन कराने और भोजन में पूर्वजों की मनपसंद वस्तुएं बनाएं जाने की सलाह दी है। इसके अलावा, घर में वर्ष में एक-दो बार हवन कराने और पानी में पितृ का वास माना गया है, इसलिए पीने के पानी के स्थान पर उनके नाम का दीपक जलाने की भी बात कही गई है। श्राद्ध पक्ष में पीपल वृक्ष पर अक्षत, तिल और फूल चढ़ाकर पूजा करनी चाहिए।

शास्त्रों में श्राद्ध पक्ष के दौरान कई नियमों का पालन करने की जरूरत बताई गई है। इस दौरान मसूर की दाल, धतूरा, अलसी, कुल्थी और मदार की दाल का प्रयोग वर्जित माना जाता है। नशीले पदार्थों के सेवन और तामसिक भोजन से भी बचना चाहिए।

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