Mon Sep 16 18:55:45 UTC 2024: ## विश्वकर्मा पूजा: कारीगरों के देवता का सम्मान
**नई दिल्ली:** 17 सितंबर को हिंदू धर्म में विश्वकर्मा जयंती मनाई जाएगी, जो कारीगरों और शिल्पकारों के देवता भगवान विश्वकर्मा की पूजा का पर्व है. भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाने वाला यह त्योहार इस साल भद्रा काल के कारण सीमित समय के लिए ही मनाया जा सकेगा. पंचांग के अनुसार, पूजा का शुभ मुहूर्त 17 सितंबर की सुबह 6:07 से 11:43 तक रहेगा.
विश्वकर्मा पूजा में कारीगर अपने उपकरणों और मशीनरी की पूजा करते हैं ताकि वे सुचारू रूप से कार्य करते रहें और उन्हें अपने काम में सफलता मिलती रहे. इस दिन, लोग अपने घरों और कार्यस्थलों को सजाते हैं और पूजा करते हैं.
विश्वकर्मा पूजा की पूजा विधि में सुबह जल्दी उठकर सबसे पहले अपनी गाड़ी, मोटर या दुकान की मशीनों को साफ करना शामिल है. फिर घर की साफ सफाई के बाद स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद, पूजा स्थल को अच्छी तरह से साफ किया जाता है और मंदिर में दीपक और धूप जलाई जाती है. जल से भरा कलश स्थापित किया जाता है और भगवान को तिलक अर्पित किया जाता है. पूजा में अक्षत, चंदन, फूल, भोग और पीली सरसों जरूर रखें.
भगवान विश्वकर्मा को पुष्प अर्पित करने के बाद, “ॐ आधार शक्तपे नमः, ॐ कूमयि नमः, ॐ अनंतम नमः, ॐ पृथिव्यै नमः, ॐ श्री सृष्टतनया सर्वसिद्धया विश्वकर्माया नमो नमः” मंत्र का उच्चारण किया जाता है. इसके बाद हाथ में लिए अक्षत और फूल भगवान को समर्पित किए जाते हैं. पीली सरसों की चार पोटलियां बनाकर उन्हें चारों दिशाओं के द्वार में बांध दिया जाता है. पूजा के अंत में भगवान विश्वकर्मा की आरती की जाती है और भगवान को भोग लगाकर सभी में प्रसाद बांटा जाता है.
विश्वकर्मा जयंती के दिन, पूजन से अगले दिन भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा का विसर्जन करने की परंपरा है.