
Tue Sep 17 08:00:07 UTC 2024: ## पितृ पक्ष: 15 दिनों तक पितरों का श्राद्ध और तर्पण
**बीकानेर:** हिन्दू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व है। यह पक्ष भाद्र मास की पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन मास की अमावस्या तक चलता है। यह लगभग 15 दिनों का होता है, जिसमें लोग अपने पितरों का श्राद्ध और तर्पण करते हैं।
पंचांगकर्ता पंडित राजेंद्र किराडू के अनुसार, श्राद्ध पक्ष में कुछ खास बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। पितृ पक्ष में 15 दिनों तक पितरों के लिए श्राद्ध-तर्पण और पूजन किया जाता है।
**पितृ पक्ष का महत्व:** धर्मशास्त्रों के अनुसार, मनुष्य जन्म लेते ही ऋषि, देव और पितृ ऋण से बंध जाता है। पितरों का ऋण श्राद्ध द्वारा चुकाया जाता है। श्राद्ध कई तरह के होते हैं, जिनमें नित्ययाद, नैमित्तिक, काम्य, वृद्धिवाद, पार्वण, गोष्ठी, शुद्धर्थ, तीर्थ, यात्रार्थ, और पुष्ट्यर्थ श्राद्ध प्रमुख हैं।
**श्राद्ध की महिमा:** पितरों की संतुष्टि के लिए इस पक्ष में श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान, पितृयज्ञ, ब्राह्मण भोजन आदि कर्म किए जाते हैं। पितर प्रसन्न होकर मनुष्यों को आयु, यश, पुत्र, कीर्ति, पुष्टि, धन-धान्य आदि प्रदान करते हैं।
**श्राद्ध का अधिकार:** विष्णुपुराण और गरुड़ पुराण के अनुसार, श्राद्ध करने का अधिकार पुत्र को है। यदि पुत्र न हो तो पुत्री का पुत्र या परिवार का कोई उत्तराधिकारी श्राद्ध कर सकता है। जिस व्यक्ति के अनेक पुत्र हों तो उनमें से केवल ज्येष्ठ पुत्र को श्राद्ध करना चाहिए।
**श्राद्धकर्त्ता के लिए वर्जित:** श्राद्ध करने के अधिकारी व्यक्ति को संपूर्ण पितृ पक्ष में सौर कर्म नहीं करना चाहिए। व्रत उपवास, ब्रह्मचर्य धर्म का पालन और श्राद्ध करने के बाद ही अन्न ग्रहण करना चाहिए। तेल लगाना और दूसरे का अन्न खाना वर्जित है।
**श्राद्ध का स्थान:** गया तीर्थ सबसे पवित्र स्थान माना जाता है। इसके अलावा, सिद्धपुर, हरिद्वार, कुरुक्षेत्र और अन्य पवित्र नदियों पर भी श्राद्ध तर्पण और पिंडदान का अत्यधिक महत्व है।