Mon Sep 16 14:00:53 UTC 2024: ## विश्वकर्मा जयंती: सृष्टि के शिल्पकार की पूजा से मिलता है आर्थिक लाभ
**नई दिल्ली:** सनातन धर्म में भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। उन्हें सृष्टि के प्रथम शिल्पकार के रूप में जाना जाता है। धर्म शास्त्रों के अनुसार, हर साल कन्या संक्रांति के दिन भगवान विश्वकर्मा पूजा का पर्व मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान की उपासना करने से आर्थिक व व्यवसायिक क्षेत्र में विशेष लाभ की प्राप्ति होती है।
विश्वकर्मा जयंती इस साल 16 और 17 सितंबर को मनाई जाएगी। कहा जाता है कि भगवान विश्वकर्मा ने स्वर्ग लोक, पुष्पक विमान, कुबेरपुरी जैसे सभी देवनगरी का निर्माण किया था। इस दिन लोग विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करते हैं, मिठाई और फल का भोग लगाते हैं और गरीबों में दान करते हैं।
पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु की नाभि से निकले कमल से ब्रह्मा जी प्रकट हुए। ब्रह्मा जी के पुत्र वास्तुदेव से जन्मे सातवें पुत्र ऋषि विश्वकर्मा थे। ऋषि विश्वकर्मा ने वास्तुकला के आचार्य बनकर जगत के पालनहार भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र, पांडवों की इंद्रप्रस्थ नगरी, भगवान श्रीकृष्ण की द्वारका नगरी, इंद्र का व्रज और सोने की लंका का निर्माण किया था।
विश्वकर्मा जयंती पर कथा का पाठ करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। कहा जाता है कि कथा (Vishwakarma Jayanti 2024 Katha) का पाठ करने से साधक को व्यवसायिक क्षेत्र में अपार सफलता प्राप्त होती है।
**विश्वकर्मा पूजा के लिए मंत्र:**
नमस्ते विश्वकर्माय, त्वमेव कर्तृता सदा।
शिल्पं विधाय सर्वत्र, त्वं विश्वेशो नमो नमः।।
**(अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है।)**